MP Rajya Sabha: मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर आगामी 18 जून को होने वाले मतदान के लिए राजनैतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। कांग्रेस के कोटे की एकमात्र सीट के लिए पार्टी के अंदर दावेदारों की लंबी लिस्ट है। इसी बीच, सूबे के सियासी गलियारों से एक बड़ी और चौंकाने वाली इनसाइड खबर सामने आ रही है। राजनैतिक सूत्रों और कमलनाथ खेमे के करीबियों की मानें तो पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के सबसे अनुभवी नेताओं में शुमार कमलनाथ इस बार खुद दिल्ली जाने के मूड में नहीं हैं। इसके बजाय, वे अपने राजनैतिक प्रभाव और दिल्ली दरबार में अपनी मजबूत पैठ का इस्तेमाल करते हुए अपने पुत्र और पूर्व सांसद नकुलनाथ का नाम रेस में आगे बढ़ा सकते हैं।
पुत्र को स्थापित करने की कवायद
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि कमलनाथ का यह कदम उनके गढ़ छिंदवाड़ा और मध्य प्रदेश की राजनीति में भविष्य के नेतृत्व को सुरक्षित करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। छिंदवाड़ा अंचल की कमान आने वाले दिनों में पूरी तरह से नकुलनाथ को ही संभालनी है। ऐसे में उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक मजबूत करने के लिए राज्यसभा भेजना नाथ परिवार के लिए सबसे मुफीद रास्ता माना जा रहा है। वही कांग्रेस आलाकमान इन दिनों संगठन में 50 फीसदी युवाओं और नए चेहरों को आगे बढ़ाने की नीति पर जोर दे रहा है। कमलनाथ इसी बदलाव का लाभ उठाकर नकुलनाथ को एक युवा चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट करने के प्रयास में जुटे हैं।
गांधी परिवार से पारिवारिक रिश्ते
नकुलनाथ के नाम को आलाकमान के सामने वजनदार बनाने के पीछे एक और दलील दी जा रही है। जानकारों के मुताबिक, कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और नकुलनाथ की उम्र के बीच बहुत ज्यादा फासला नहीं है और दोनों लगभग एक ही पीढ़ी के नेता हैं। इसके अलावा, नेहरू-गांधी परिवार और कमलनाथ परिवार के बीच दशकों पुराने गहरे पारिवारिक संबंध रहे हैं। नकुलनाथ को राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीबियों में गिना जाता है। ऐसे में कमलनाथ को उम्मीद है कि इस पारिवारिक केमिस्ट्री और युवाओं को आगे लाने के राहुल गांधी के फॉर्मूले के तहत नकुलनाथ के नाम पर दिल्ली में मुहर लग सकती है।
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
हालांकि, मध्य प्रदेश कांग्रेस की तरफ से अभी तक राज्यसभा उम्मीदवार के नाम को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान या सूची जारी नहीं की गई है। लेकिन जिस तरह से अचानक मीनाक्षी नटराजन, जीतू पटवारी और अरुण यादव के नामों के बीच नकुलनाथ के नाम की सुगबुगाहट तेज हुई है, जिससे प्रदेश कांग्रेस के अन्य दावेदारों और दिग्गजों की धड़कनें जरूर बढ़ा दी हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि छिंदवाड़ा के इस पावर गेम को दिल्ली दरबार से हरी झंडी मिलती है या पार्टी किसी अन्य समीकरण पर दांव खेलती है।
