MP Rajya Sabha: मध्य प्रदेश की सियासत में आगामी जून के महीने में होने जा रहे राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर बिसात बिछनी शुरू हो गई है। प्रदेश की 3 रिक्त हो रही राज्यसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों का चयन दोनों ही प्रमुख दलों के लिए एक बड़ी परीक्षा माना जा रहा है। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि सत्ताधारी दल अपने पुराने चेहरों पर ही भरोसा जताते हुए बड़ा बदलाव करने के मूड में नहीं है। इस रेस में केंद्रीय मंत्री जॉर्ज कुरियन और आदिवासी चेहरा डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी की दावेदारी सबसे मजबूत होकर उभरी है, जबकि तीसरी सीट पर कांग्रेस के दिग्गज दिग्विजय सिंह को घेरने के लिए भाजपा एक बड़ा दांव खेल सकती है।
कुरियन,सोलंकी क्यों रिपीट?
राजनैतिक जानकारों के मुताबिक, भाजपा के पास इन दोनों ही नेताओं को दोबारा राज्यसभा भेजने को लेकर कई कारण हैं। जॉर्ज कुरियन मोदी कैबिनेट में बतौर मंत्री शामिल है। ऐसे में अपने पद को बनाए रखने के लिए संसद के किसी भी सदन का सदस्य होना अनिवार्य है। ऐसे में भाजपा उन्हें मध्य प्रदेश कोटे से फिर राज्यसभा भेजेगी।
वही मालवा अंचल के बड़वानी जिले से आने वाले डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी को बीजेपी आलाकमान भविष्य के एक बड़े आदिवासी नेता के रूप में देख रहा है। वे शिक्षित हैं और आदिवासी समाज के बीच भाजपा की नीतियों को रखने में माहिर हैं। पीएम मोदी और अमित शाह के विश्वस्त माने जाने वाले सोलंकी का टिकट सिर्फ एक ही शर्त पर कट सकता है, यदि संगठन उन्हें दिल्ली बुलाकर राष्ट्रीय कार्यकारिणी में कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंप दे।
नाथ का पत्ता साफ!
मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट वर्तमान में कांग्रेस के कद्दावर नेता दिग्विजय सिंह के पास है। राजनैतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस एक बार फिर दिग्विजय सिंह को ही दिल्ली भेजने की तैयारी में है। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी इस सीट के जरिए राज्यसभा जाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं, लेकिन आलाकमान के रुख को देखते हुए अब उनका पत्ता पूरी तरह साफ माना जा रहा है।
दिग्विजय के सामने अरविंद भदौरिया?
इसी बीच, दिग्विजय सिंह के धुर विरोधी और भाजपा के कद्दावर नेता अरविंद भदौरिया की सक्रियता अचानक बेहद बढ़ गई है। सूत्रों का कहना है कि साल 2020 में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार गिराने के मुख्य रणनीतिकार और मास्टरमाइंड रहे अरविंद भदौरिया को भाजपा तीसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतार सकती है। सूबे में सामान्य वर्ग को साधने और दिग्विजय सिंह को उनके ही गढ़ में चुनौती देने के लिए भदौरिया पर दांव लगाना भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
