मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस के भीतर वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह को एक बार फिर राज्यसभा भेजने की मांग जोर पकड़ती दिखाई दे रही है. पार्टी के वरिष्ठ नेता पीसी शर्मा के बयान के बाद यह चर्चा अब सिर्फ प्रदेश तक सीमित नहीं रही, बल्कि दिल्ली तक पहुंच गई है. माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में कांग्रेस हाईकमान इस मुद्दे पर बड़ा फैसला ले सकता है.
दिग्विजय सिंह का नाम फिर से आ रहा सामने
कांग्रेस के अंदर इस बात को लेकर लगातार मंथन चल रहा है कि मौजूदा राजनीतिक हालात में अनुभवी नेताओं को राज्यसभा भेजना पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. इसी वजह से दिग्विजय सिंह का नाम सबसे प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है. हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और केंद्रीय हाईकमान की सहमति के बाद ही लिया जाएगा.
दिल्ली में जल्द ही एक अहम बैठक
सूत्रों की मानें तो दिल्ली में जल्द ही एक अहम बैठक होने वाली है, जिसमें मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीटों को लेकर रणनीति तैयार की जाएगी. इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी शामिल हो सकते हैं. माना जा रहा है कि इसी बैठक में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विस्तार से चर्चा होगी और किसी एक नाम पर सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी.
भाजपा नेताओं ने क्या कहा
वहीं दूसरी तरफ भाजपा ने कांग्रेस के अंदर चल रही हलचल को लेकर हमला बोलना शुरू कर दिया है. भाजपा नेताओं का कहना है कि कांग्रेस में अंदरूनी एकता की कमी साफ दिखाई दे रही है और पार्टी नेता आपसी खींचतान में उलझे हुए हैं. भाजपा ने इसे कांग्रेस की कमजोर संगठनात्मक स्थिति का संकेत बताया है.
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 1 जून से शुरू
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया 1 जून से नामांकन के साथ शुरू होगी. इसके बाद 18 जून को मतदान और मतगणना दोनों एक ही दिन कराए जाएंगे. मध्य प्रदेश में इस बार तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है और विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों को देखते हुए भाजपा की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है.
भाजपा के पास 164 विधायक
विधानसभा में भाजपा के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 64 सदस्य हैं. इसी गणित के आधार पर माना जा रहा है कि दो सीटों पर भाजपा की जीत लगभग तय है, जबकि एक सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है. ऐसे में कांग्रेस के लिए उम्मीदवार चयन सिर्फ सीट जीतने का सवाल नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश देने का भी अहम हिस्सा बन गया है.
दिग्विजय सिंह का कार्यकाल हो रहा खत्म
जिन नेताओं का राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें दिग्विजय सिंह का नाम भी शामिल है. ऐसे में पार्टी के भीतर पुराने अनुभवी चेहरों और नए नेताओं के बीच संतुलन बनाने को लेकर चर्चा और तेज हो गई है. अब सबकी नजर दिल्ली में होने वाली बैठक पर टिकी है, जहां यह तय होगा कि कांग्रेस अनुभव को प्राथमिकता देती है या नए राजनीतिक समीकरणों के साथ आगे बढ़ती है.
