MP Cabinet Expansion: मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार में जल्द ही एक बड़ी राजनैतिक सर्जरी देखने को मिल सकती है। मुख्यमंत्री मोहन यादव के हालिया दिल्ली दौरों और केंद्रीय आलाकमान के साथ हुई मुलाकातों के बाद कैबिनेट विस्तार का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। सूत्रों का दावा है कि दिल्ली से हरी झंडी मिलते ही जून महीने के अंत तक नई कैबिनेट का गठन कर दिया जाएगा। इस फेरबदल में न केवल खराब परफॉर्मेंस वाले 5 से 6 मौजूदा मंत्रियों की कुर्सी जाएगी, बल्कि विभागों के बंटवारे में भी बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा।
इन मंत्रियों को मिलेगी संगठन में नई भूमिका
राजनैतिक गलियारों में चल रही चर्चाओं के अुनसार, इस बार बदलाव केवल छोटे मंत्रियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई कद्दावर नेताओं की भूमिकाएं भी बदली जा रही हैं। कैबिनेट के कद्दावर और पूर्व राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय को राज्यसभा भेजे जाने की प्रबल संभावना है। वहीं, वरिष्ठ मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को केंद्र में संगठन के अंदर कोई बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
इन पर गिरेगी गाज!
कर्नल सोफिया कुरैशी पर दिए गए अपने विवादित बयान को लेकर चर्चा में आए मंत्री विजय शाह की कुर्सी पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसके अलावा, विभागों की गोपनीय समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार, प्रतिमा बागरी और राधा सिंह को भी मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।
ये विधायक बनेंगे मंत्री!
खाली हो रहे मंत्री पदों और नए समीकरणों को साधने के लिए भाजपा नए और अनुभवी चेहरों पर काम कर रही है। जिन नामों पर सबसे ज्यादा कयास लगाए जा रहे हैं, उनमें सागर जिले से जातिगत और क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए शैलेंद्र जैन या प्रदीप लारिया में से किसी एक को मौका मिल सकता है। वहीं, बुंदेलखंड अंचल के ही कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री बृजेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी इस रेस में काफी ऊपर चल रहा है।
सिंधिया खेमे की वापसी।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेहद करीबी और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री प्रभुराम चौधरी की एक बार फिर से मोहन कैबिनेट में वापसी की उम्मीद जताई जा रही है। इसके अलावा सिंधिया समर्थक विधायकों में से किसी एक विधायक को मंत्रिमंडल में शामिल करने पर भी विचार किया जा सकता है।
विभागों में होगा बड़ा बदलाव!
वर्तमान में मुख्यमंत्री समेत मध्य प्रदेश कैबिनेट के सदस्यों की कुल संख्या 31 है, जबकि नियमों के मुताबिक अभी भी 4 पद खाली हैं। सूत्रों का कहना है कि सरकार इस बार सिर्फ नए चेहरों को शपथ ही नहीं दिलाएगी, बल्कि पुराने मंत्रियों के विभागों को बदलेगी ताकि प्रशासनिक कसावट को और मजबूत किया जा सके।
