खबर डिजिटल संवाददाता कटनी— शहर में यातायात व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है और नियम-कानून सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह गए हैं। कचहरी चौराहा और रानी लक्ष्मीबाई चौराहा पर लगे “NO PARKING” के बोर्ड अब महज शोपीस बनकर रह गए हैं। इनके ठीक नीचे बेखौफ तरीके से चार पहिया वाहन घंटों खड़े किए जा रहे हैं और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे तमाशा देख रहा है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यातायात विभाग की कार्रवाई का डंडा इन वाहनों तक पहुंचते-पहुंचते कुंद क्यों पड़ जाता है? क्या नियम केवल आम जनता के लिए बनाए गए हैं? क्या रसूखदारों और पहुंच वाले लोगों के वाहन नो पार्किंग के नियमों से ऊपर हैं?हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि सोमवार रात करीब 8 बजे इसी लापरवाही की कीमत एक मासूम बच्चे को चुकानी पड़ी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नो पार्किंग में खड़े वाहनों के कारण टर्निंग पर दृश्यता बाधित हुई, ई-रिक्शा और स्कूटी आपस में सटकर निकल गए और स्कूटी पर सवार एक छोटा बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। लेकिन हादसे के बाद भी जिम्मेदारों की संवेदनाएं नहीं जागीं और न ही कोई ठोस कार्रवाई सामने आई।आखिर यह कैसा यातायात प्रबंधन है, जहां चौराहों पर अवैध पार्किंग खुलेआम फल-फूल रही है और विभागीय अमला या तो मूकदर्शक बना हुआ है या फिर सब कुछ देखकर भी अनदेखा कर रहा है। यदि नो पार्किंग क्षेत्र में खड़े वाहनों पर तत्काल चालानी कार्रवाई होती, तो शायद हादसों की नौबत ही नहीं आती।अब शहर की जनता पूछ रही है कि आखिर कटनी का यातायात विभाग कहां गायब हो गया है? क्या किसी बड़े हादसे और निर्दोष जान जाने का इंतजार किया जा रहा है? क्या नियम तोड़ने वालों को किसी का संरक्षण प्राप्त है? या फिर कार्रवाई केवल हेलमेट चेकिंग और फोटो सेशन तक सीमित होकर रह गई है?जब नो पार्किंग में खड़े वाहनों को हटाया नहीं जा सकता, तो फिर चौराहों पर लगे बोर्ड आखिर किसके लिए हैं?अब जरूरत है कि जिम्मेदार अधिकारी तत्काल मौके का निरीक्षण करें, नो पार्किंग में खड़े वाहनों पर सख्त कार्रवाई करें और यह साबित करें कि कटनी में कानून आज भी जिंदा है, वरना जनता के मन में यह सवाल और गहरा होता जाएगा कि शहर में यातायात व्यवस्था नहीं, बल्कि अव्यवस्था का राज चल रहा है।
कटनी से सौरभ श्रीवास्तव की रिपोर्ट mo. 9131308097
