एक समय था जब चंबल क्षेत्र में कंधे पर लाइसेंसी बंदूक रखना और उसे प्रतिष्ठा का प्रतीक मानना आम बात थी. लेकिन बदलते दौर में यह तस्वीर काफी भयावह हो चुकी है. अब ग्वालियर और आसपास के इलाकों में अवैध हथियारों का चलन तेजी से बढ़ रहा है. देसी तमंचे और अवैध पिस्टल न केवल अपराध की वजह बन रहे हैं, बल्कि युवाओं के बीच भी इन्हें लेकर आकर्षण बढ़ता जा रहा है.
प्रदेश में सबसे अधिक मामले
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में अवैध हथियारों से जुड़े सबसे ज्यादा मामले ग्वालियर में दर्ज किए गए हैं. पुलिस रिकॉर्ड में ऐसे 227 प्रकरण सामने आए हैं. हालांकि यह संख्या केवल उन मामलों की है जिनमें आरोपी पकड़े गए. विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक आंकड़ा इससे कहीं अधिक हो सकता है.
ऑनलाइन ऑर्डर और घर तक सप्लाई
अवैध हथियारों के कारोबारियों ने अब अपना नेटवर्क काफी मजबूत कर लिया है. शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में हथियारों की आपूर्ति के लिए संगठित चैनल काम कर रहे हैं. मांग बढ़ने के साथ-साथ अब हथियारों की ऑनलाइन बुकिंग और तय स्थान पर डिलीवरी जैसी गतिविधियां भी सामने आ रही हैं. खासकर युवाओं में हथियार रखने और दिखाने की प्रवृत्ति इस कारोबार को बढ़ावा दे रही है. हाल ही में थाटीपुर क्षेत्र में एक दर्दनाक घटना ने इस समस्या की गंभीरता उजागर कर दी. परिवार के एक कार्यक्रम में रौब दिखाने के लिए अवैध पिस्टल लाई गई थी. खुशी के मौके पर कई फायर भी किए गए. अगले दिन लापरवाही के दौरान पिस्टल से चली गोली ने एक महिला की जान ले ली. यह घटना बताती है कि अवैध हथियार केवल कानून व्यवस्था ही नहीं, बल्कि आम लोगों की जिंदगी के लिए भी बड़ा खतरा हैं.
सोशल मीडिया भी बना वजह
पुलिस की निगरानी में यह बात भी सामने आई है कि कई युवा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हथियारों के साथ फोटो और वीडियो साझा कर रहे हैं. ऐसे मामलों में कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में भी लिया गया. हथियारों को स्टेटस सिंबल के रूप में पेश करना नई पीढ़ी को गलत दिशा में ले जा रहा है. रिटायर्ड पुलिस अधिकारी राकेश सिन्हा का मानना है कि ग्वालियर में अवैध हथियारों की मांग लंबे समय से बनी हुई है. लाइसेंसी हथियारों पर सख्ती बढ़ने के बाद अवैध हथियारों का बाजार फैल गया है. उनके अनुसार केवल छोटे तस्करों को पकड़ने से समस्या खत्म नहीं होगी. हथियार बनाने वाले गिरोहों, सप्लाई नेटवर्क और खरीददारों तक पहुंचकर पूरी श्रृंखला को खत्म करना जरूरी है. तभी इस खतरनाक कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी.
