भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों के बीच मंगलवार को राजधानी भोपाल में महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में किसानों से जुड़े 41 प्रमुख मुद्दों पर चर्चा की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री ने किसानों के हित में कई अहम घोषणाएं कीं और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
बैठक का सबसे बड़ा फैसला ट्रैक्टर में ही डीजल देने की अनिवार्यता को समाप्त करना रहा। अब किसानों को जरूरत के अनुसार डीजल लेने में पहले जैसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा।
किसानों की मांग पर डीजल नियम में बड़ा बदलाव
बैठक में किसानों ने डीजल वितरण व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं उठाईं। इस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ट्रैक्टर में ही डीजल भरवाने की अनिवार्य व्यवस्था को तत्काल समाप्त किया जाए।
इस फैसले से खेती-किसानी के काम में किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है। किसान अपनी जरूरत के अनुसार आसानी से डीजल प्राप्त कर सकेंगे।
लंबित भुगतान और MSP खरीदी पर दिए निर्देश
बैठक में ग्रीष्मकालीन मूंग और उड़द की गिरदावरी पंजीयन अवधि बढ़ाने तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी शुरू करने की मांग भी रखी गई। मुख्यमंत्री ने चना, मसूर, दलहन और गेहूं की सरकारी खरीदी के बाद जिन किसानों का भुगतान लंबित है, उन्हें जल्द भुगतान करने के निर्देश दिए। साथ ही खाद वितरण व्यवस्था को सरल बनाने और किसानों को पर्याप्त खाद उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
बिजली व्यवस्था सुधारने और जल संरक्षण पर जोर
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली की समस्या को लेकर भी बैठक में चर्चा हुई। ओवरलोड ट्रांसफार्मरों की क्षमता बढ़ाने, नए पीटीआर लगाने और जर्जर बिजली तारों को बदलने पर सहमति बनी।
इसके अलावा जल संरक्षण के लिए नहरों को तालाबों से जोड़ने की योजना पर भी विचार किया गया। इसका उद्देश्य बारिश के अतिरिक्त पानी का संग्रह कर सिंचाई में उपयोग बढ़ाना है।
गेहूं खरीदी में मध्य प्रदेश ने बनाया रिकॉर्ड
सरकार के अनुसार इस वर्ष 9 अप्रैल से 28 मई के बीच समर्थन मूल्य पर गेहूं की रिकॉर्ड खरीदी हुई है। प्रदेश के 13.42 लाख किसानों से 104.36 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। किसान संख्या के मामले में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर पहुंच गया है, जबकि कुल उपार्जन के मामले में पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर रहा।
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