मध्य प्रदेश में तबादला नीति के तहत लंबे समय से इंतजार कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए आखिरकार बड़ी हलचल देखने को मिली. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा तबादलों की अंतिम तारीख को 16 जून की रात तक बढ़ाने के फैसले के बाद प्रशासनिक स्तर पर अभूतपूर्व गतिविधियां शुरू हो गईं. कुछ ही घंटों के भीतर प्रदेशभर में करीब 5 हजार अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादला आदेश जारी कर दिए गए, जिससे कई विभागों में व्यापक बदलाव देखने को मिला.
तकनीकी कारणों से अटके थे आदेश
मूल रूप से तबादलों की अंतिम तिथि 15 जून तय की गई थी. हालांकि कई विभागों में प्रस्ताव तैयार होने और मंत्रियों की मंजूरी मिलने के बावजूद आदेश जारी नहीं हो पाए थे. बताया गया कि ई-ऑफिस सिस्टम पर अत्यधिक दबाव और कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो सकी. यह मुद्दा कैबिनेट बैठक के दौरान भी सामने आया, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने एक दिन का अतिरिक्त समय देने का निर्णय लिया. इसके तुरंत बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने संशोधित आदेश जारी कर दिए.
शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग में सबसे ज्यादा बदलाव
समय सीमा बढ़ने के साथ ही विभागीय स्तर पर गतिविधियां तेज हो गईं. दोपहर से लेकर देर रात तक लगातार तबादला आदेश जारी होते रहे. सबसे अधिक बदलाव स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य, खाद्य, वन और राजस्व विभाग में देखने को मिले. बड़ी संख्या में अधिकारियों और कर्मचारियों को एक जिले से दूसरे जिले में नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं.
प्रशासनिक अधिकारियों की भी बदली जिम्मेदारियां
इससे पहले राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की एक बड़ी सूची भी जारी की गई थी. इस सूची में 56 अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी सहित कुल 155 अधिकारियों के तबादले किए गए. कई ऐसे अधिकारी भी शामिल रहे जिन्हें हाल ही में पदोन्नति मिली थी और वे लंबे समय से नई पदस्थापना की प्रतीक्षा कर रहे थे. डिप्टी कलेक्टर स्तर के अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं.
अब असर पर टिकी सबकी नजर
तबादलों की प्रक्रिया 1 जून से शुरू हुई थी, लेकिन कई विभागों में तैयारियां समय पर पूरी नहीं हो पाईं. अंतिम दिनों में आवेदन और अनुमोदन की प्रक्रिया में तेजी लाई गई. खासकर अंतिम 24 घंटों में जिस गति से आदेश जारी हुए, उसने पूरे प्रशासनिक तंत्र में बड़ा बदलाव ला दिया.
राजनीतिक और प्रशासनिक जानकार इसे मोहन सरकार के कार्यकाल की सबसे बड़ी प्रशासनिक कवायद मान रहे हैं. अब सभी की नजर इस बात पर है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए तबादलों का असर सरकारी कामकाज, जिला प्रशासन और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर किस तरह दिखाई देता है.
