तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है. जबलपुर स्थित हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर पहले से लगी अंतरिम रोक को समाप्त कर दिया है. इस फैसले के बाद भोपाल की विशेष MP-MLA कोर्ट द्वारा जारी वारंट को लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता खुल गया है.
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला
पूरा मामला एक राजनीतिक बयान से जुड़ा है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2020 में हुई थी. उस दौरान कोलकाता में आयोजित एक जनसभा में अभिषेक बनर्जी ने भाजपा नेता आकाश विजयवर्गीय को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी. आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक मंच से आकाश विजयवर्गीय को “गुंडा” कहा था. इस बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया और बाद में इसे अदालत तक ले जाया गया.
इसके बाद वर्ष 2021 में भाजपा नेता आकाश विजयवर्गीय ने भोपाल की MP-MLA कोर्ट में एक परिवाद दायर किया. मामले की सुनवाई शुरू हुई, लेकिन अदालत में पेशी को लेकर कई बार सवाल उठे. बताया जाता है कि सुनवाई के दौरान अभिषेक बनर्जी अदालत में उपस्थित नहीं हुए, जिसके चलते ट्रायल कोर्ट ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया.
मुश्किल में अभिषेक बनर्जी
वारंट जारी होने के बाद अभिषेक बनर्जी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने शुरुआती तौर पर राहत देते हुए गिरफ्तारी वारंट के अमल पर अंतरिम रोक लगा दी थी. इससे उन्हें अस्थायी सुरक्षा मिल गई थी और आगे की कार्रवाई फिलहाल थम गई थी.
वारंट पर लगी रोक हटी
हालांकि, मामले की अगली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का अवलोकन किया. अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता की ओर से पर्याप्त अवसर मिलने के बावजूद प्रभावी ढंग से पैरवी नहीं की गई. कोर्ट ने इस पहलू को गंभीरता से लिया और अंतरिम राहत को जारी रखने का कोई आधार नहीं माना. न्यायमूर्ति प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद गिरफ्तारी वारंट पर लगी रोक हटाने का आदेश दिया. साथ ही अदालत ने अपने आदेश की प्रति संबंधित ट्रायल कोर्ट को भेजने के निर्देश भी दिए, ताकि आगे की प्रक्रिया नियमों के अनुसार पूरी की जा सके.
अभिषेक बनर्जी को जबरदस्त झटका
कानूनी जानकार इस फैसले को अभिषेक बनर्जी के लिए एक महत्वपूर्ण झटका मान रहे हैं. अब इस मामले में अगला कदम भोपाल की MP-MLA कोर्ट और स्थानीय प्रशासन की ओर से उठाया जाएगा. आने वाले दिनों में अदालत की प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई तय होगी.
