डिंडौरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ पैतृक जमीन को हड़पने के लिए फर्जी वसीयत, कूटरचित शपथपत्र और अवैध नामांतरण का बड़ा मामला सामने आया है। डिंडौरी निवासी इन्द्रपाल सोनपाली ने अपने ही चाचा, चचेरे भाई के साथ-साथ हल्का पटवारी और तत्कालीन तहसीलदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए सिटी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डिंडौरी ने 11 जून 2026 को इस मामले में धारा 156(3) के तहत FIR दर्ज कर जांच के आदेश दिए हैं।
आवेदक इन्द्रपाल सोनपाली पिता स्व. सुदेशपाल सोनपाली, निवासी वार्ड 04 डिंडौरी ने बताया कि उनके दादा स्व. बालमुकुंद सोनपाली का निधन वर्ष 1989 में हो गया था। उनकी समस्त चल-अचल संपत्ति डिंडौरी नगर और आसपास के ग्रामों में है। दादा की मृत्यु के बाद संपत्ति बंटवारे को लेकर परिवार में विवाद हुआ। व्यवहार प्रकरण 28ए/2021 डिंडौरी न्यायालय में चला, जिसकी अपील 446/2006 माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर में विचाराधीन है।
आवेदक का आरोप है कि उच्च न्यायालय ने 07 मई 2007 को स्थगन आदेश पारित किया था कि नंदलाल सोनपाली, अनंतराम सोनपाली, मृत सुदेशपाल सोनपाली और मृत कमलेश सोनपाली अपील के निराकरण तक स्व. बालमुकुंद सोनपाली की समस्त संपत्ति का विक्रय नहीं कर सकेंगे। इसके बावजूद अनावेदक नंदलाल सोनपाली ने फर्जी वसीयत तैयार कर जमीन अपने नाम कर ली।
कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवाकर फर्जीवाड़ा
आवेदन के अनुसार, डिंडौरी नगर वार्ड 5 स्थित 3.245 हेक्टेयर पैतृक भूमि पर मकान, कुआं और बगीचा है। नंदलाल सोनपाली ने फर्जी वसीयत के आधार पर तहसीलदार के प्रकरण क्रमांक 0345/अ-6/2022-23 आदेश दिनांक 04 जुलाई 2022 से यह जमीन अपने नाम करवा ली और 05 अगस्त 2022 को पुत्र रोहित सोनपाली को दानपत्र से हस्तांतरित कर दी।
इसी तरह ग्राम सुखवार वार्ड 01 स्थित खसरा नंबर 104, रकबा 3.5450 हेक्टेयर भूमि भी फर्जी वसीयत से प्रकरण क्रमांक 0346/अ-6/2022-23 आदेश 04 जुलाई 2022 से अपने नाम करवा कर 26 अक्टूबर 2022 को अनिल खनूजा को बेच दी गई।
आवेदक ने आरोप लगाया कि दोनों नामांतरण प्रकरणों में 01 जून 2022 और 20 जून 2022 को उसके कूटरचित हस्ताक्षर कर शपथपत्र तैयार किए गए। उसमें लिखा गया कि इन्द्रपाल को नंदलाल सोनपाली के नाम पर नामांतरण से कोई आपत्ति नहीं है। आवेदक का कहना है कि वह कभी तहसीलदार के समक्ष उपस्थित ही नहीं हुआ और कोरे कागजों पर हस्ताक्षर करवाकर फर्जीवाड़ा किया गया।
आवेदक ने हल्का पटवारी हिरेन्द्र सूर्याम और तत्कालीन तहसीलदार गोविंद राम सलामे पर अनावेदक नंदलाल और रोहित सोनपाली के साथ मिलकर दस्तावेजों की कूटरचना करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि दोनों नामांतरण प्रकरणों की फाइलें पटवारी और तहसीलदार ने अपने पास रखीं। जब प्रतिलिपि मांगी गई तो 27 दिसंबर 2022 को फाइल तहसील कार्यालय को दी गई।
वार्ड 05 की भूमि परिवर्तित भूमि थी, जिसे पटवारी और तहसीलदार ने राजस्व अभिलेखों से परिवर्तित श्रेणी से हटा दिया ताकि बिना कलेक्टर की अनुमति के हस्तांतरण हो सके। दानपत्र में यह भी गलत लिखा गया कि भूमि पर मकान, कुआं या वृक्ष नहीं हैं।
तहसीलदार ने पद का दुरुपयोग किया
आवेदन में कहा गया है कि वसीयतकर्ता स्व. लीलावती सोनपाली का निधन वर्ष 2001 में हो चुका था। वसीयत को 21 साल बाद नामांतरण के लिए पेश किया गया और बिना वारिसानों को नोटिस दिए नामांतरण कर दिया गया। उच्च न्यायालय के निर्णयों के अनुसार वसीयत के आधार पर नामांतरण का अधिकार राजस्व न्यायालयों को नहीं है। फिर भी तहसीलदार ने पद का दुरुपयोग किया। वसीयत दिनांक 19 अप्रैल 2001 को भी कूटरचित बताया गया है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गिरजेश कुमार सनोडिया ने 11 जून 2026 को आदेश में कहा कि तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश के पुनरीक्षण आदेश 20 फरवरी 2026 के परिप्रेक्ष्य में परिवादी का आवेदन धारा 156(3) के तहत थाना प्रभारी को भेजा जाए। अनावेदक नंदलाल सोनपाली, रोहित सोनपाली, पटवारी हिरेन्द्र सूर्याम और तत्कालीन तहसीलदार गोविंदराम सलामे के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर अनुसंधान कर अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जाए। अभियोग पत्र प्रस्तुति हेतु 17 अगस्त 2026 की तारीख नियत की गई है।
आवेदक ने नामांतरण प्रकरण और राजस्व अभिलेख जब्त करने की भी मांग की है ताकि साक्ष्य प्रभावित न हों। इस आवेदन की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक, कलेक्टर डिंडौरी, मुख्य सचिव भोपाल और पुलिस महानिदेशक को भी भेजी गई है।
