मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों कैबिनेट विस्तार और संभावित फेरबदल को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. माना जा रहा है कि मानसून सत्र खत्म होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी टीम में कुछ बड़े बदलाव कर सकते हैं. हाल ही में उन्होंने परफॉर्मेंस के आधार पर फैसले लेने के संकेत दिए थे, जिसके बाद सत्ता और संगठन दोनों में हलचल बढ़ गई है.
कुछ मंत्रियों की बढ़ सकती है मुश्किल
सूत्रों की मानें तो सरकार मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा कर रही है. विभागों के प्रदर्शन, जनप्रतिनिधियों की फीडबैक और हालिया विवादों को भी इस मूल्यांकन का हिस्सा माना जा रहा है. ऐसे में कुछ मौजूदा मंत्रियों की जिम्मेदारियों में बदलाव या मंत्रिमंडल से बाहर होने की अटकलें लगाई जा रही हैं.
सबसे ज्यादा चर्चा वरिष्ठ मंत्री विजय शाह को लेकर है. कर्नल सोफिया कुरैशी से जुड़े विवादित बयान के बाद वह लगातार विपक्ष के निशाने पर हैं. इतना ही नहीं, इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और कानूनी स्तर पर भी सवाल उठे हैं. इसी वजह से उनके भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही हैं. वहीं राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल का नाम भी चर्चा में है. उनके कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इसके अलावा दिलीप अहिरवार, प्रतिमा बागरी और राधा सिंह के विभागीय प्रदर्शन पर भी राजनीतिक गलियारों में बातचीत जारी है.
कैलाश विजयवर्गीय को मिल सकती है नई भूमिका
राजनीतिक हलकों में कैलाश विजयवर्गीय की भूमिका को लेकर भी अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं. चर्चा है कि उन्हें संगठन में बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. कुछ अटकलें यह भी हैं कि भविष्य में उन्हें किसी राज्य के राज्यपाल की जिम्मेदारी मिल सकती है. वहीं प्रहलाद पटेल और तुलसीराम सिलावट के विभागों में भी बदलाव की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है.
नए चेहरों की एंट्री की अटकलें
कैबिनेट विस्तार की संभावनाओं के बीच कुछ नए और अनुभवी नेताओं के नाम भी सामने आ रहे हैं. क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन को ध्यान में रखते हुए बुंदेलखंड के दिग्गज नेता गोपाल भार्गव की वापसी की चर्चा तेज हो गई है. महिला प्रतिनिधित्व को और मजबूत करने के लिए रीति पाठक, मालिनी गौड़ और अर्चना चिटनीस के नाम भी संभावित दावेदारों में गिने जा रहे हैं. वहीं युवा और नए चेहरों में प्रदीप लारिया और बृजेंद्र प्रताप सिंह को भी मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है.
आधिकारिक घोषणा का इंतजार
फिलहाल भाजपा संगठन या राज्य सरकार की तरफ से किसी भी फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. लेकिन राजनीतिक संकेत और अंदरूनी चर्चाओं को देखते हुए माना जा रहा है कि मानसून सत्र के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में कई बड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं. अब सबकी नजर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अगले कदम पर टिकी हुई है.
