MP Nikay Chunav: मध्य प्रदेश में साल 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनावों को लेकर कांग्रेस ने अभी से अपनी कमर कसनी शुरू कर दी है। शनिवार को भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में नगरीय निकाय चुनाव प्रकोष्ठ की एक बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का नेतृत्व प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और पीसीसी चीफ जीतू पटवारी कर रहे थे। बैठक में सभी जिलों के प्रभारी और जिला अध्यक्षों को आमंत्रित किया गया था। हालांकि, सियासी गलियारों में चर्चा का विषय यह रहा कि नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को बैठक में बुलाया गया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे।
जीत के बाद भाजपा का दामन
बैठक के दौरान नेताओं ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले नगरीय निकाय चुनाव में प्रदेश की 16 नगर निगमों/नगर पालिकाओं में से 5 पर कांग्रेस ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। लेकिन बड़ा झटका तब लगा जब उन 5 जीते हुए नेताओं में से 3 पार्टी छोड़कर भाजपा के पाले में चले गए।
आरक्षण से पहले फ्री हैंड टिकट
जीतू पटवारी और हरीश चौधरी ने जिला प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि निकायों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने तक प्रत्याशियों का चयन लगभग पूरा हो जाना चाहिए, ताकि उम्मीदवारों को अपने वार्ड और क्षेत्र में प्रचार करने का पर्याप्त समय और फ्री हैंड मिल सके।
5 साल वफादारी का बांड
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बैठक में प्रस्ताव आया है कि अब जिताऊ उम्मीदवार का चयन होने के बाद उससे एक बांड भरवाया जाएगा, जिसमें पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन होगा। कांग्रेस का विधि प्रकोष्ठ सभी तय उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह के लिए बी फार्म सौंपने के साथ ही यह बांड पेपर भी देगा। इस बांड में कानूनी रूप से यह शर्त होगी कि चुनाव जीतने के बाद अगले पांच साल तक उम्मीदवार अनिवार्य रूप से कांग्रेस पार्टी में ही बने रहेंगे और पार्टी का कार्य करेंगे।
मतभेद, अंतिम मुहर बाकी
हालांकि, इस बांड पॉलिसी को लेकर कांग्रेस के अंदर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। शनिवार की बैठक के दौरान कई पदाधिकारी इस बांड के प्रस्ताव पर पूरी तरह सहमत नहीं थे, जिसके कारण इस पर अंतिम मुहर नहीं लग सकी है। लेकिन जिस प्रकार से मप्र में कांग्रेस नेताओं का पलायन जारी है, उसने शीर्ष नेतृत्व की टेंशन को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। अगर आगामी दिनों में कोई बड़ा विवाद खड़ा नहीं होता है, तो कांग्रेस 2027 के निकाय रण में इस बांड पॉलिसी का दांव खेल सकती है।
