MP Congress: मध्य प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर सार्वजनिक हो गई है। कांग्रेस प्रदेश महासचिव एवं पूर्व राज्यसभा सांसद सत्यव्रत चतुर्वेदी की पुत्री निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्जिवजय सिंह पर सोशल मीडिया के माध्यम से तीखा हमला बोला है। उन्होंने उज्जैन के भूमि विवाद और वीर भारत न्यास प्रकरण को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी पर दिग्विजय सिंह की सार्वजनिक टिप्पणी को अनुशासनहीनता करार दिया।
निधि का पोस्ट और पुत्र मोह
निधि चतुर्वेदी ने अपने फेसबुक पोस्ट में आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा और पुत्र-मोह के चलते संगठन को नुकसान पहुंचा रहे हैं। उनका कहना है कि यदि प्रदेश अध्यक्ष के किसी बयान पर आपत्ति थी, तो उसे पार्टी के आंतरिक मंच पर उठाया जाना चाहिए था, न कि सार्वजनिक रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया जाता।
दिग्गी का बयान, कमजोर संगठन
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह की बयानबाजी से कांग्रेस संगठन कमजोर हो रहा है और विपक्ष को राजनीतिक लाभ मिल रहा है। निधि ने वर्ष 2020 में प्रदेश की कांग्रेस सरकार गिरने, 2023 एवं 2024 के चुनावों में पार्टी की हार और हालिया राज्यसभा चुनाव का भी उल्लेख करते हुए इसके लिए व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को जिम्मेदार ठहराया।
दिग्गी पर कार्रवाई की मांग
अपने बयान में निधि चतुर्वेदी ने कांग्रेस हाईकमान से मांग की है कि पार्टी की साख और कार्यकर्ताओं के मनोबल को बनाए रखने के लिए दिग्विजय सिंह के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। उनका वीडियो बयान और फेसबुक पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
अरूण यादव का हमला
दिग्विजय और पटवारी मामले में पूर्व केंन्द्रीय मंत्री अरूण यादव ने भी एंट्री मारी है। अरूण यादव ने एक्स पर राहुल गांधी के नाम एक पोस्ट किया है। पोस्ट में अरूण यादव ने लिखा है कि मध्यप्रदेश में आंतरिक संघर्ष और असफलताओं सहित अन्य समस्याओं से जूझ रही भारतीय जनता पार्टी और उसकी सरकार से जब इस दौर में भी पार्टी संगठन का वास्तविक निष्ठावान कार्यकर्ता वैचारिक और सतही तौर पर संघर्ष कर रहा है।
मनोबल तोड़ने की कोशिश
उन्होंने आगे लिखा है कि उस दौर में कतिपय लोग एक मिलीजुली साजिश के तहत उन कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने की नाकाम कोशिश कर रहे है, इस बात में भी कोई संदेह नहीं है कि युवाओं का जोश और पार्टी के अनुभवी नेताओं का होश मिलजुल कर ही फासीवादी विचारधारा का सामना कर पाएगा ऐसी स्थिति में जवाबदार लोग ही अपनी व्यक्तिगत पीड़ा और वैमनस्यता पार्टी के कार्यकर्ताओं की कीमत पर भुनाने की कोशिश करेंगे तो वह समयोचित नहीं होगी। कृपा कर केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप से संघर्षशील कार्यकर्ताओं के मनोबल को टूटने से बचाएं तथा संगठनात्मक एकता को सुदृढ़ करवाने की कृपा करें।
