दतिया विधानसभा उपचुनाव की तारीखों का ऐलान होते ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. भाजपा और कांग्रेस अपनी रणनीति बनाने में जुटी हैं, लेकिन इस बीच भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी ने सबसे पहले अपना उम्मीदवार घोषित कर राजनीतिक मुकाबले को नया मोड़ दे दिया है. पार्टी ने दामोदर यादव को दतिया सीट से मैदान में उतारा है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या दामोदर यादव चुनाव में मजबूत चुनौती पेश करेंगे या मुकाबला आखिरकार भाजपा और कांग्रेस के बीच ही सिमट जाएगा.
दामोदर यादव ने बढ़ाई दोनों दलों की चिंता
दामोदर यादव पिछले काफी समय से दतिया में लगातार सक्रिय हैं. किसान सम्मेलन, जनसंपर्क अभियान और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकों के जरिए उन्होंने अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है. चुनाव की घोषणा से पहले ही वे क्षेत्र में लगातार माहौल बनाने में जुटे हुए थे.
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार दतिया में मुकाबला सीधा नहीं बल्कि त्रिकोणीय हो सकता है. यदि आजाद समाज पार्टी अच्छा प्रदर्शन करती है तो इसका सबसे ज्यादा असर कांग्रेस पर पड़ सकता है. खुद दामोदर यादव भी कई बार कह चुके हैं कि वे कांग्रेस और बसपा से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं के संपर्क में हैं.
यादव वोट बैंक बन सकता है गेम चेंजर
दतिया विधानसभा में करीब 18 हजार यादव मतदाता हैं. माना जा रहा है कि दामोदर यादव की उम्मीदवारी का फायदा आजाद समाज पार्टी को मिल सकता है. यदि यादव वोट बड़ी संख्या में उनके पक्ष में जाते हैं तो कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक प्रभावित हो सकता है. यही वजह है कि इस चुनाव में जातीय समीकरण भी अहम भूमिका निभाते नजर आ रहे हैं.
दतिया में उपचुनाव क्यों हो रहा है
दतिया सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होने के बाद खाली हुई है. उन्हें दो साल से ज्यादा की सजा मिलने के कारण विधानसभा की सदस्यता स्वत: समाप्त हो गई. इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने सीट रिक्त घोषित कर निर्वाचन आयोग को सूचना भेजी. अब चुनाव आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव कराने का कार्यक्रम घोषित कर दिया है.
भाजपा से नरोत्तम मिश्रा सबसे मजबूत दावेदार
भाजपा की ओर से पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है. राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होने के बाद से ही नरोत्तम मिश्रा लगातार दतिया में सक्रिय हैं. उन्होंने कई सामाजिक कार्यक्रमों और जनसंपर्क अभियानों में हिस्सा लिया है.सूत्रों के मुताबिक दतिया के लिए कुछ बड़ी सरकारी घोषणाओं की भी तैयारी चल रही है. बताया जा रहा है कि हाल ही में उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी मुलाकात की थी. भाजपा का मानना है कि पिछली बार की चुनावी गलतियों से सीख लेकर इस बार संगठन पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगा.
कांग्रेस में टिकट को लेकर खींचतान
कांग्रेस में टिकट को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है. पूर्व विधायक राजेंद्र भारती अपने बेटे अनुज भारती के लिए टिकट की कोशिश कर रहे हैं. वहीं पिछली बार टिकट से वंचित रहे अवधेश नायक भी खुद को मजबूत दावेदार मान रहे हैं. पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के समर्थक भी सक्रिय हो चुके हैं. हालांकि कांग्रेस जिला अध्यक्ष अशोक दांगी का कहना है कि पार्टी में किसी तरह की गुटबाजी नहीं है और उम्मीदवार का फैसला सर्वे रिपोर्ट और संगठन की राय के आधार पर किया जाएगा.
जातीय समीकरण तय कर सकते हैं चुनाव का परिणाम
दतिया में जातीय समीकरण चुनाव की दिशा बदल सकते हैं. यादव समाज के करीब 18 हजार वोट हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि इस बार यादव वोटों का बड़ा हिस्सा आजाद समाज पार्टी की ओर जा सकता है.
इसके अलावा करीब 37 हजार कुशवाहा मतदाता भी इस सीट पर प्रभाव रखते हैं. माना जा रहा है कि यदि इस समाज का कोई प्रभावशाली उम्मीदवार मैदान में उतरता है तो इसका असर सबसे ज्यादा कांग्रेस के वोट बैंक पर पड़ सकता है.
