सिवनी/खबर डिजिटल/संतोष वन्देवार/ सिवनी जनपद पंचायत सिवनी के अंतर्गत आने वाली जिले की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत कान्हीवाड़ा इन दिनों प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली का शिकार है। विडंबना देखिए कि जिले की सबसे बड़ी पंचायत होने के बावजूद कान्हीवाड़ा पिछले 5 वर्षों से स्थाई ‘सचिव विहीन’ है। पंचायत का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे पीसीओ रामकुमार सूर्यवंशी की कार्यप्रणाली और कथित मनमानी से स्थानीय ग्रामीण बेहद त्रस्त हैं। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के कारण आज इस बड़ी पंचायत के नागरिक मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
समय पर नहीं हुई नालियों की सफाई, पहली बारिश में ही खुली पोल
ग्रामीणों का आरोप है कि मानसून सिर पर होने के बावजूद पंचायत प्रशासन द्वारा समय रहते नाली निर्माण, मरम्मत या पानी निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। कागजों पर दावों की पोल पहली तेज बारिश ने ही खोल कर रख दी है। नालियां कचरे से चोक हैं, जिसके कारण निकासी पूरी तरह ठप हो चुकी है।
वार्ड नंबर 17 में घुसा गंदा पानी, जनजीवन अस्त-व्यस्त
निकासी की उचित व्यवस्था न होने का खमियाजा कान्हीवाड़ा के वार्ड नंबर 17 के बाशिंदों को भुगतना पड़ रहा है। बीते दिनों हुई बारिश के बाद वार्ड नंबर 17 के कई घरों में नालियों का गंदा पानी घुस गया।
घरों में पानी भरने से ग्रामीणों का राशन, कपड़े और कीमती सामान खराब हो गया है।
सड़न और बदबू के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा मंडरा रहा है।
बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना दूभर हो गया है।
ग्रामीणों का आक्रोश
जब हम अपनी समस्या लेकर पंचायत प्रभारी या पीसीओ के पास जाते हैं, तो हमारी सुनवाई नहीं होती। अपनी मनमानी के चलते वे ग्रामीणों की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं। अगर जल्द ही स्थाई सचिव की नियुक्ति और जल निकासी का समाधान नहीं हुआ, तो हम उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे
उच्चाधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग
जिले की सबसे बड़ी पंचायत में इस तरह की अव्यवस्था और लापरवाही ने जनपद पंचायत के प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कान्हीवाड़ा के जागरूक नागरिकों ने जिला कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत से मांग की है कि
- तत्काल प्रभाव से कान्हीवाड़ा में एक योग्य और स्थाई सचिव की नियुक्ति की जाए।
- लापरवाह PCO के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।
- वार्ड नंबर 17 सहित पूरी पंचायत में जल निकासी और नाली निर्माण का कार्य युद्धस्तर पर शुरू कराया जाए।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर कब तक जागता है, या फिर कान्हीवाड़ा के लोग इसी तरह नारकीय जीवन जीने को मजबूर रहेंगे।
