डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी, शिक्षा को समाज का सबसे पवित्र स्तंभ माना जाता है, जहाँ बच्चे अपने सुनहरे भविष्य के सपने बुनते हैं। माता-पिता अपनी गाढ़ी कमाई का एक बड़ा हिस्सा निजी स्कूलों को सौंपते हैं, इस उम्मीद में कि उनके बच्चे वहाँ न सिर्फ अच्छी शिक्षा पाएंगे, बल्कि पूरी तरह सुरक्षित भी रहेंगे ।मामला डिंडोरी जिले के गाड़ासरई से सामने आया। कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया के निर्देशन में जिला शिक्षा अधिकारी श्रीमती सुमन परस्ते अपनी टीम के साथ औचक निरीक्षण के लिए विरासनी शिशु विद्या मंदिर हायर सेकेंडरी स्कूल पहुंचीं।
निरीक्षण में पाया गया कि स्कूल की गाड़ियाँ बिना वैध फिटनेस सर्टिफिकेट के चलाई जा रही थीं। और बसों की सीट फटी हुई थी। क्या कोई बड़ा हादसा होने का इंतजार किया जा रहा था? चंद रुपयों को बचाने के लिए मासूम जिंदगियों को इस तरह खतरे में डालना बेहद असंवेदनशील और दर्दनाक है।
स्कूल सिर्फ किताबों को रटने की जगह नहीं होती, वह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास का केंद्र होता है। लेकिन विरासनी शिशु विद्या मंदिर में बच्चों का बचपन छोटे-छोटे, तंग और घुटन भरे कमरों में कैद मिला। खेल का मैदान, जहाँ बच्चों को खुलकर हंसना और दौड़ना चाहिए, वहाँ नदारद था। मध्य प्रदेश निजी विद्यालय नियमों को ताक पर रखकर, स्वीकृत परिसर से बाहर अलग-अलग कमरों में स्कूल को ऐसे चलाया जा रहा था मानो कोई व्यापारिक गोदाम हो।
एक तरफ सुविधाओं का यह सूखा था, तो दूसरी तरफ फीस वसूलने में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही थी। विद्यालय प्रबंधन द्वारा पालकों से मनमाने तरीके से मोटी रकम वसूली जा रही थी। शिक्षा के मंदिर को व्यापार की मंडी में तब्दील होते देखना समाज के लिए एक बड़ी चेतावनी है।
जांच दल में शामिल ए.डी.पी.सी. प्रवीण तिवारी और विभिन्न शासकीय स्कूलों के प्राचार्यों आलोक जैन, जे. एस. मरकाम, बी. एस. पंद्राम ने इन कमियों को बेहद गंभीरता से लिया है। डीईओ श्रीमती सुमन परस्ते ने इस घोर लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताते हुए स्पष्ट किया कि, ”बच्चों के भविष्य और उनकी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। विरासनी शिशु विद्या मंदिर को तत्काल सुधार करने के निर्देश दिए गए हैं और नियमों के उल्लंघन के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”
यह खबर सिर्फ एक स्कूल की अनियमितताओं की कहानी नहीं है, बल्कि उन सभी पालकों के भरोसे के टूटने की दास्तां है जो आंखें मूंदकर निजी स्कूलों पर विश्वास कर लेते हैं। प्रशासन का यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, और उम्मीद है कि इस कार्रवाई के बाद अन्य स्कूल भी मुनाफे की अंधी दौड़ से बाहर निकलकर बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों का सम्मान करना सीखेंगे।
