रसोई में इस्तेमाल होने वाला एलपीजी गैस सिलेंडर जितना सुविधाजनक है, उतना ही लापरवाही होने पर खतरनाक भी साबित हो सकता है. गैस रिसाव या आग लगने जैसी घटनाएं कुछ ही सेकंड में बड़े हादसे का रूप ले सकती हैं. ऐसे में एक छोटा सा सुरक्षा उपकरण आपकी और आपके परिवार की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है. यह उपकरण है Fire Extinguisher Ball, जिसे फायर बॉल भी कहा जाता है. इसकी कीमत करीब 999 रुपए बताई जाती है और यह आग लगने की स्थिति में अपने आप सक्रिय होकर आग बुझाने का काम करती है.
कैसे काम करती है Fire Extinguisher Ball
एलपीजी फेडरेशन ग्वालियर-चंबल के कोऑर्डिनेटर श्यामानंद शुक्ला के अनुसार फायर बॉल एक आधुनिक सुरक्षा उपकरण है. इसे गैस सिलेंडर के पास, बिजली के मीटर, इनवर्टर, पैनल बोर्ड या अन्य संवेदनशील स्थानों पर रखा या लटकाया जा सकता है.
जब यह बॉल आग के सीधे संपर्क में आती है तो लगभग 3 से 5 सेकंड के भीतर स्वतः सक्रिय होकर फट जाती है. इसके अंदर मौजूद मोनो अमोनियम फॉस्फेट नामक रसायन तेजी से फैलता है और कुछ ही सेकंड में आग की तीव्रता को कम करते हुए उसे बुझाने में मदद करता है. यही वजह है कि शुरुआती चरण में आग को फैलने से रोका जा सकता है.
किन तरह की आग पर असरदार है यह डिवाइस
फायर बॉल कई प्रकार की आग पर प्रभावी मानी जाती है. यह लकड़ी और कागज जैसी वस्तुओं में लगी आग, ज्वलनशील तरल पदार्थों से लगी आग, एलपीजी जैसी गैस से लगी आग और बिजली के उपकरणों में लगने वाली आग को नियंत्रित करने में उपयोगी है. इसका वजन लगभग 400 ग्राम से लेकर 1.3 किलोग्राम तक होता है, इसलिए महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी जरूरत पड़ने पर इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं.
इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार लगाने के बाद करीब 5 साल तक किसी सर्विसिंग या विशेष रखरखाव की जरूरत नहीं पड़ती.
एलपीजी उपभोक्ताओं को मिलता है 40 लाख रुपए तक का बीमा
बहुत कम लोगों को यह जानकारी होती है कि एलपीजी गैस कनेक्शन रखने वाले उपभोक्ताओं के लिए दुर्घटना बीमा की सुविधा भी उपलब्ध है. सिलेंडर नियम 2004 और एक्सप्लोसिव एक्ट 1884 के तहत गैस कंपनियां अपने उपभोक्ताओं के लिए बीमा कवर उपलब्ध कराती हैं. यदि गैस सिलेंडर से जुड़ी किसी दुर्घटना में जानमाल का नुकसान होता है तो निर्धारित नियमों के अनुसार प्रभावित उपभोक्ता 40 लाख रुपए तक के बीमा मुआवजे का दावा कर सकता है.
हाल के हादसों ने बढ़ाई चिंता
मध्य प्रदेश के कई जिलों में हाल के महीनों में गैस सिलेंडर से जुड़े हादसे सामने आए हैं. इंदौर में एक मकान में आग लगने के बाद कई सिलेंडरों में विस्फोट हुआ, जिससे पूरे घर में आग फैल गई. वहीं देवास में भी सिलेंडर ब्लास्ट की घटना में कई लोग झुलस गए थे. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि घरों में फायर बॉल जैसे सुरक्षा उपकरण लगाए जाएं और समय-समय पर गैस कनेक्शन की जांच कराई जाए तो ऐसे हादसों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है.
