खबर डिजिटल न्यूज़ रिपोर्टर /कटनी– सरसवाही स्थित माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर में छात्राओं के बीमार पड़ने की घटना ने जिले के आवासीय छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ, कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारियों की टीम ने छात्रावास पहुंचकर पेयजल, भोजन, स्वास्थ्य और सुरक्षा व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया तथा कई सुधारात्मक कदम शुरू कराए। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि व्यवस्थाएं पहले से दुरुस्त होतीं तो क्या दर्जनों छात्राओं की तबीयत बिगड़ती?घटना के बाद हैंडपंप की व्यवस्था, पेयजल सुधार, स्वास्थ्य टीम की तैनाती, भोजन की जांच और सफाई अभियान शुरू कर दिया गया। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि छात्रावास में पहले से कई मूलभूत व्यवस्थाओं में कमी थी, जिन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया। आखिर नियमित निरीक्षण और निगरानी के बावजूद ऐसी स्थिति क्यों बनी?जिले में संचालित अन्य शासकीय एवं अशासकीय छात्रावासों की स्थिति भी जांच के दायरे में लाई जानी चाहिए। केवल एक छात्रावास में कार्रवाई कर औपचारिकता पूरी करना पर्याप्त नहीं होगा। जिला प्रशासन को सभी छात्रावासों का अचानक निरीक्षण कर भोजन, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य सुविधाओं, सुरक्षा और छात्राओं की रहने की व्यवस्था की वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए।यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी अधिकारी, कर्मचारी या जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही के कारण छात्राओं का स्वास्थ्य प्रभावित हुआ, तो उनके खिलाफ केवल नोटिस नहीं बल्कि कठोर विभागीय और कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। जिम्मेदारी तय किए बिना ऐसी घटनाएं दोहराई जाती रहेंगी और निरीक्षण केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे।प्रशासन के लिए यह एक चेतावनी भी है। छात्रावासों की निगरानी समय-समय पर होनी चाहिए ताकि जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर जवाबदेही का दबाव बना रहे। बेटियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य केवल सरकारी बयान का विषय नहीं, बल्कि प्रशासन की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यदि समय रहते नियमित निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित नहीं की गई तो भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता। जनता अब केवल निरीक्षण नहीं, बल्कि दोषियों पर ठोस और दिखाई देने वाली कार्रवाई की अपेक्षा कर रही है।
Hostel Negligence Under Scanner
