मध्यप्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए 19 जुलाई का दिन अहम माना जा रहा है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में जगदीशपुर में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य में समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड-यूसीसी) लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई. इसके साथ ही राज्य सरकार ने सभी नागरिकों के लिए निजी नागरिक मामलों में एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है.
शादी, तलाक और उत्तराधिकार के लिए एक समान नियम
सरकार के अनुसार प्रस्तावित समान नागरिक संहिता का उद्देश्य राज्य के सभी नागरिकों के लिए, उनके धर्म से अलग, विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, संपत्ति से जुड़े अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे निजी मामलों में एक समान कानून लागू करना है. सरकार का मानना है कि इससे अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण होने वाली असमानताओं को दूर किया जा सकेगा और सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित होगी.
महिलाओं की सुरक्षा और समान अधिकार पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रस्तावित संहिता का सबसे बड़ा उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और उन्हें समान अधिकार दिलाना है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के कारण लंबे समय से महिलाओं के साथ कई मामलों में असमान व्यवहार देखने को मिलता रहा है. नई व्यवस्था के माध्यम से विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे विषयों में महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार देने का प्रयास किया गया है.
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित कानून धार्मिक परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों का सम्मान करता है. जिन धार्मिक प्रथाओं का संबंध सार्वजनिक नैतिकता और कानून व्यवस्था से टकराव नहीं रखता, उन्हें संरक्षण देने का भी प्रावधान रखा गया है.
संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुरूप पहल
मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय संविधान के नीति-निदेशक तत्वों में शामिल अनुच्छेद 44 राज्यों को समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करने की दिशा देता है. इसी संवैधानिक भावना को ध्यान में रखते हुए “मध्यप्रदेश समान नागरिक संहिता-2026” का प्रारूप तैयार किया गया है.
सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य विवाह, विवाह-विच्छेद, उत्तराधिकार और सहवासी संबंधों जैसे नागरिक विषयों को एक समान कानूनी ढांचे में लाना है, ताकि समानता, लैंगिक न्याय, गरिमा और कानून के शासन जैसे संवैधानिक मूल्यों को और मजबूती मिल सके.
अन्य राज्यों के अनुभवों का भी लिया गया अध्ययन
राज्य सरकार के मुताबिक प्रस्तावित यूसीसी का मसौदा तैयार करने से पहले उत्तराखंड, गुजरात और असम में लागू समान नागरिक संहिता का विस्तृत अध्ययन किया गया. उनके अनुभवों और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश के लिए यह प्रारूप तैयार किया गया है.
सरकार का मानना है कि समान नागरिक संहिता लागू होने से प्रदेश में निजी नागरिक मामलों से जुड़े कानून अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और समान होंगे. साथ ही महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने और सभी नागरिकों को समान कानूनी संरक्षण देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है.
