मध्य प्रदेश की राजनीति में भाजपा नेता महेश केवट ने एक नया अध्याय जोड़ दिया है. उन्होंने आज संसद में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण की. इस मौके पर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दीं. महेश केवट का राज्यसभा पहुंचना इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि पिछले एक दशक में राज्यसभा की तीसरी सीट पर जीत दर्ज करने वाले वह पहले नेता बने हैं. इस उपलब्धि ने उन्हें प्रदेश की राजनीति में एक अलग पहचान दिलाई है.
तीसरी सीट का चुनाव हमेशा रहा चुनौतीपूर्ण
मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीसरी सीट का चुनाव पिछले 10 वर्षों में कई बार राजनीतिक चर्चा का केंद्र रहा है. आमतौर पर इस सीट पर मुकाबला बेहद रोचक और चुनौतीपूर्ण माना जाता है. पहले हुए चुनावों में भाजपा को इस सीट पर अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी थी. राजनीतिक समीकरण और विधायकों की संख्या को देखते हुए इस बार भी मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा था. हालांकि परिस्थितियां ऐसी बनीं कि चुनाव के परिणाम ने सभी को चौंका दिया.
निर्विरोध जीत ने बदले राजनीतिक समीकरण
राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद पूरी तस्वीर बदल गई. इसके बाद महेश केवट के सामने कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं बचा और उन्हें निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया. इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने चुनावी गणित पूरी तरह बदल दिया और भाजपा को बिना मतदान के तीसरी सीट पर जीत मिल गई. राजनीतिक जानकार इसे चुनावी रणनीति और परिस्थितियों का अनोखा मेल मान रहे हैं.
पहले दो चुनावों में भाजपा को नहीं मिली थी सफलता
साल 2016 में भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार विनोद गोटिया ने राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें कांग्रेस के विवेक तन्खा से हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद वर्ष 2020 में भी तीसरी सीट पर कड़ा मुकाबला हुआ. उस चुनाव में कांग्रेस के फूल सिंह बरैया मैदान में थे, जबकि भाजपा की ओर से ज्योतिरादित्य सिंधिया और सुमेर सिंह सोलंकी राज्यसभा पहुंचे. बरैया को उस चुनाव में 18 वोटों से हार मिली थी.
हेमंत खंडेलवाल ने दी शुभकामनाएं
महेश केवट के शपथ ग्रहण के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें बधाई दी. उन्होंने अपने संदेश में महेश केवट के सफल राजनीतिक सफर की सराहना करते हुए राज्यसभा सदस्य के रूप में नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं. भाजपा संगठन ने भी इसे प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है.
महेश केवट का राज्यसभा पहुंचना केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है. खासकर तीसरी सीट पर निर्विरोध जीत और 10 साल बाद बना यह रिकॉर्ड लंबे समय तक राजनीतिक चर्चाओं का विषय बना रहेगा.
