Tuesday, November 3, 2026
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इंदौर का ‘ऑपरेशन लोटा’ सफल… 2 किलो का चांदी का लोटा खोजने के लिए 24 घंटे तक खंगाला गया कचरे का पहाड़!

इंदौर/खबर डिजिटल/नरेन्द्र महावर/ स्वच्छता के लिए देशभर में अपनी अलग पहचान रखने वाला इंदौर एक बार फिर अनोखी वजह से सुर्खियों में है। इस बार नगर निगम ने किसी अपराधी या लापता व्यक्ति की नहीं, बल्कि करीब दो किलो वजनी चांदी के लोटे की तलाश के लिए विशेष अभियान चलाया। घरेलू कचरे के साथ गलती से फेंका गया यह कीमती लोटा करीब 24 घंटे की मशक्कत के बाद ट्रेंचिंग ग्राउंड से सुरक्षित बरामद कर लिया गया। शहर में इस पूरे अभियान को लोग अब ‘ऑपरेशन लोटा’ के नाम से पहचान रहे हैं।

सफाई के दौरान अनजाने में कचरे में चला गया लोटा

जानकारी के मुताबिक, राजेंद्र नगर क्षेत्र के एक परिवार से घर की सफाई के दौरान करीब दो किलो चांदी का लोटा गलती से घरेलू कचरे के साथ नगर निगम के कचरा वाहन में चला गया। कुछ समय बाद जब परिवार को इसका पता चला तो उन्होंने तत्काल नगर निगम अधिकारियों से संपर्क कर सहायता मांगी।

वाहन की ट्रैकिंग कर शुरू किया गया सर्च अभियान

सूचना मिलते ही नगर निगम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई शुरू की। सबसे पहले संबंधित कचरा वाहन की ट्रैकिंग कर उसका पूरा रूट खंगाला गया और यह पता लगाया गया कि कचरा किस ट्रेंचिंग ग्राउंड पर पहुंचा है। इसके बाद अधिकारियों ने विशेष टीम गठित कर मौके पर खोज अभियान शुरू कराया।

20 कर्मचारियों और जेसीबी की मदद से घंटों चली तलाश

अभियान में लगभग 20 कर्मचारी, तीन वरिष्ठ अधिकारी और जेसीबी मशीनों को लगाया गया। ट्रेंचिंग ग्राउंड पर जमा कचरे के बड़े ढेरों को अलग-अलग कर बारीकी से छानबीन की गई। सैकड़ों टन कचरे की जांच के बाद करीब 24 घंटे की लगातार मेहनत रंग लाई और टीम ने चांदी का लोटा सुरक्षित खोज निकाला।

दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी कर मालिक को सौंपा गया लोटा

कीमती वस्तु मिलने की सूचना मिलते ही परिवार ने राहत की सांस ली। नगर निगम ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद चांदी का लोटा उसके वास्तविक मालिक को सौंप दिया। परिवार ने निगम अधिकारियों और कर्मचारियों की तत्परता तथा समर्पण की सराहना करते हुए उनका आभार व्यक्त किया।

शहर में चर्चा का विषय बना ‘ऑपरेशन लोटा’

यह अनोखा अभियान पूरे शहर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। आमतौर पर कचरे के विशाल ढेर में खोई हुई वस्तु को तलाशना बेहद कठिन माना जाता है, लेकिन नगर निगम की तकनीकी व्यवस्था, वाहन ट्रैकिंग सिस्टम, बेहतर समन्वय और कर्मचारियों की मेहनत ने इस चुनौतीपूर्ण कार्य को सफल बना दिया। यह अभियान इस बात का उदाहरण है कि सुनियोजित प्रयास और मजबूत टीमवर्क से असंभव दिखने वाला काम भी संभव किया जा सकता है।

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