खबर डिजिटल रिपोर्टर /कटनी– जिलेभर में पुलिस मुख्यालय एवं पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर थाना क्षेत्रों, गांवों, कस्बों, स्कूल-कॉलेजों, रेलवे स्टेशन, न्यायालय परिसर और सार्वजनिक स्थानों पर ‘नशा मुक्ति जनजागरूकता अभियान’ लगातार चलाया जा रहा है। लोगों को नशे से दूर रहने की सीख दी जा रही है, पंपलेट बांटे जा रहे हैं और वाहन चालकों पर शराब पीकर वाहन चलाने के मामलों में मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 185 के तहत कार्रवाई कर जुर्माना भी लगाया जा रहा है।लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या इन अभियानों का वास्तविक असर धरातल पर दिखाई दे रहा है? क्या केवल वाहन चेकिंग और चालानी कार्रवाई से समाज नशामुक्त हो सकता है, या फिर नशे की सप्लाई चेन पर भी उतनी ही सख्ती जरूरी है?तथाकथित सूत्रों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस आम नागरिकों के प्रति तो नशे के मामलों में सख्त रवैया अपनाती है, लेकिन नशीले पदार्थों और अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों पर अपेक्षित स्तर की प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। लोगों का कहना है कि यदि मादक पदार्थों की बिक्री और अवैध कारोबार पर लगातार और कठोर कार्रवाई हो, तो नशे की उपलब्धता स्वतः कम हो सकती है।जनता का आरोप है कि शहर से लेकर गांवों तक कई स्थानों पर होटल, ढाबों और अन्य जगहों पर अवैध शराब बिक्री और कथित अवैध पैकारी की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि कई मामलों में कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए गतिविधियां बंद होती हैं, लेकिन बाद में फिर से शुरू हो जाती हैं। ऐसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।यही कारण है कि लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब पुलिस लगातार नशा मुक्ति अभियान चला रही है, तब जिले में नशे के कारोबार में अपेक्षित कमी क्यों नहीं दिखाई दे रही? लोगों का मानना है कि जागरूकता अभियान तभी प्रभावी साबित होगा, जब उसके साथ-साथ नशे की सप्लाई और अवैध कारोबार पर भी लगातार, निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।जनता की अपेक्षा है कि नशा मुक्ति अभियान केवल जागरूकता तक सीमित न रहे, बल्कि नशे के पूरे नेटवर्क पर निर्णायक कार्रवाई कर जिले को वास्तव में नशामुक्त बनाने की दिशा में ठोस परिणाम भी सामने आएं।
“नशे पर भाषण, कारोबार पर खामोशी? कटनी में अभियान की हकीकत पर सवाल”
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