खबर डिजिटल न्यूज़ रिपोर्टर /कटनी— जिले की जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से प्रत्येक मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में आयोजित होने वाली जनसुनवाई पर अब सवाल उठने लगे हैं। बड़ी उम्मीद लेकर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचने वाले शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उनकी शिकायतें तो सुनी जाती हैं, लेकिन समाधान केवल कागजों तक सीमित रह जाता है।जनसुनवाई में विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहते हैं और शिकायतकर्ताओं की समस्याएं सुनकर कार्रवाई का भरोसा भी दिलाते हैं। लेकिन कई फरियादियों का कहना है कि वे महीनों से लगातार आवेदन दे रहे हैं, फिर भी उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।सबसे अधिक शिकायतें जमीन विवाद और अवैध कब्जों से जुड़ी सामने आ रही हैं। पीड़ितों का आरोप है कि उनकी जमीन पर कब्जा होने के बावजूद प्रशासन प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा, जिसके चलते उन्हें बार-बार कलेक्टर कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।शिकायतकर्ताओं का यह भी आरोप है कि संबंधित विभागों के कार्यालयों में पहुंचने पर उनकी समस्याओं के समाधान के बजाय उनसे ही लगातार सवाल किए जाते हैं। कुछ लोगों का कहना है कि प्रभावशाली और रसूखदार लोगों के मामलों में अधिकारियों का रवैया अलग दिखाई देता है, जबकि गरीब और आम नागरिकों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता।लगातार सामने आ रहे ऐसे आरोपों ने जनसुनवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि शिकायतों का समयबद्ध और निष्पक्ष निराकरण नहीं हुआ, तो जनसुनवाई का उद्देश्य केवल औपचारिकता बनकर रह जाएगा।अब निगाहें प्रशासन पर हैं कि वह इन आरोपों पर क्या रुख अपनाता है और क्या वास्तव में जनसुनवाई आम नागरिकों को त्वरित एवं निष्पक्ष न्याय दिलाने का प्रभावी मंच बन पाएगी।
कटनी की जनसुनवाई पर उठे सवाल: “आश्वासन तो मिलता है, न्याय कब मिलेगा?”
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