Tuesday, November 3, 2026
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MP Moong Rate: मूंग के दाम में जोरदार उछाल, किसानों को मिलेगा मोटा फायदा, 500 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी

मध्य प्रदेश में गर्मी के मौसम में होने वाली मूंग की खरीद अब सरकार के लिए बड़ी वित्तीय चुनौती बनती जा रही है. पिछले दो वित्तीय वर्षों में समर्थन मूल्य पर खरीदी गई मूंग के कारण सरकार को करीब 2,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है. वहीं वर्ष 2025-26 की खरीदी गई फसल पर भी 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये तक के अतिरिक्त नुकसान की आशंका जताई जा रही है. इसकी मुख्य वजह यह है कि राज्य सरकार केंद्र द्वारा तय खरीद सीमा से अधिक मूंग खरीद रही है, लेकिन अतिरिक्त मात्रा को केंद्र नहीं खरीदता. ऐसे में सरकार को इसे खुले बाजार में कम कीमत पर बेचना पड़ता है.

केंद्र के कोटे से ज्यादा खरीद बनी नुकसान की वजह

हर साल केंद्र सरकार समर्थन मूल्य तय करने के साथ राज्यों के लिए खरीद का एक निश्चित कोटा भी निर्धारित करती है. पिछले तीन वर्षों से मध्य प्रदेश में तय सीमा से कहीं अधिक मूंग की खरीदी हुई है. वित्तीय वर्ष 2023-24 में राज्य ने 5.60 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी, जिसमें 2.84 लाख मीट्रिक टन केंद्र के कोटे से अधिक थी. इसके बाद 2024-25 में 5.80 लाख मीट्रिक टन खरीद हुई, जिसमें 2.49 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त रही. इस अतिरिक्त स्टॉक को खुले बाजार में बेचने के लिए कई बार टेंडर जारी किए गए, लेकिन व्यापारियों ने समर्थन मूल्य से काफी कम कीमत की पेशकश की. मजबूरी में सरकार को भारी नुकसान सहते हुए स्टॉक बेचना पड़ा.

आंदोलन के बाद किसानों को मिला बड़ा फायदा

मूंग खरीदी को लेकर किसानों के आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने खरीद की सीमा बढ़ा दी. पहले प्रति एकड़ लगभग 120 किलो मूंग खरीदी जाती थी, जिसे बढ़ाकर 300 किलो यानी करीब 3 क्विंटल कर दिया गया. इस फैसले का सीधा असर मंडियों पर दिखाई दिया. खरीद सीमा बढ़ने की घोषणा के बाद किसानों ने तुरंत बिक्री कम कर दी, जिससे मंडियों में आवक घटी और मूंग के दाम एक ही दिन में 300 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ गए. हालांकि किसानों का कहना है कि मौजूदा बाजार भाव भी समर्थन मूल्य से कम हैं और गुणवत्ता के आधार पर उन्हें अभी भी प्रति क्विंटल 1,500 से 3,000 रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

आगे भी बढ़ सकता है घाटा

वित्तीय वर्ष 2025-26 में मध्य प्रदेश ने 7.72 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीदी, जबकि केंद्र का स्वीकृत लक्ष्य केवल 4.19 लाख मीट्रिक टन था. यानी 3.53 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त स्टॉक सरकार के पास मौजूद है. अधिकारियों के मुताबिक इसे बेचने के लिए कई बार टेंडर जारी किए जा चुके हैं, लेकिन खरीदार अपेक्षित कीमत नहीं दे रहे हैं. यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो सरकार को एक बार फिर हजारों करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है.

स्थायी समाधान की मांग

विशेषज्ञों और अधिकारियों का मानना है कि इस समस्या का स्थायी समाधान जरूरी है. यदि मूंग की गुणवत्ता और कीटनाशकों के उपयोग को लेकर कोई चिंता है तो वैज्ञानिक जांच कर उचित नीति बनाई जाए. वहीं किसानों का कहना है कि जब उत्पादन लगातार बढ़ रहा है तो केंद्र सरकार को भी खरीद का कोटा बढ़ाना चाहिए, ताकि किसानों और राज्य सरकार दोनों को आर्थिक नुकसान से बचाया जा सके.

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