Wednesday, November 4, 2026
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मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जबलपुर में 362.31 करोड़ की लागत से तैयार ‘अमृत 1.0’ सीवेज परियोजना का किया शुभारंभ

जबलपुर/खबर डिजिटल/ मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शनिवार को जबलपुर में 362.31 करोड़ की लागत से तैयार ‘अमृत 1.0’ सीवेज परियोजना का शुभारंभ किया। साथ ही कठौंदा, ललपुर और तेवर में बने तीन बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का लोकार्पण किया।

मुख्यमंत्री ने सिविल लाइन में आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडर्न लॉन्ड्री की सौगात दी, गुरंदी में 2.5 करोड़ रुपये की लागत से बने नए मछली बाजार का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने पीएम स्वनिधि के हितग्राहियों को डिजिटल कार्ड भी प्रदान किए। इतना ही नहीं, उन्होंने जबलपुर में इमारती लकड़ियों से फर्नीचर निर्माण के लिए फर्नीचर कलस्टर स्थापित करने और सांदीपनि की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जबलपुर फर्नीचर निर्माण का नया केंद्र बनेगा। कार्यक्रम में ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत 11 लाख पौधरोपण महाअभियान का भी शुभारंभ हुआ।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से आकाशवाणी को नई पहचान दी और युवाओं को संचार तकनीक से परिचित कराया। देश की 80 करोड़ आबादी को नि:शुल्क राशन, पक्का मकान, नि:शुल्क शौचालय, हर घर नल से जल, आयुष्मान कार्ड के माध्यम से 5 लाख रुपए तक के इलाज की सुविधा मिल रही है। रेहड़ी वाले छोटे व्यापारियों को पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत लाभ मिल रहा है। आज जबलपुर के अनेक हितग्राहियों को डिजिटल कार्ड प्रदान किए गए हैं। हर गरीब के जीवन में सुख का सूरज निकले, राज्य सरकार सहयोग की भावना से कार्य कर रही है। सरकार का अर्थ सहकार और सहकार का अर्थ परिवार की सहायता करना है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि दुनिया के सामने भारत वसुधैब कुटुम्बकम का एक आदर्श उदाहरण है। भारतीय परंपरा प्राचीनकाल से इसी भाव से आगे बढ़ती रही है। प्रकृति के साथ रिश्ता बनाने के लिए आज जबलपुर से 11 लाख पौधे लगाने के लिए पौधारोपण अभियान का शुभारंभ किया गया है। पेड़ हमारे जीवन में ऋषि-मुनियों के समान हैं, जिनसे हमें स्वच्छ हवा मिलती है। वृक्षारोपण के लिए नई मियावाकी पद्धति से एक एकड़ भूमि पर 12 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं। यह क्षेत्र तीन साल में सघन वन बन जाता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। यहां हरे-भरे सघन वन हैं।

नदियां जंगलों को आबाद रखती हैं। लोगों को जल मिलता है। सभी को खुशहाली और आगे बढ़ने का अवसर देती हैं। नर्मदा नदी से गुजरात और राजस्थान को भी समृद्धि मिलती है। मध्यप्रदेश की जलराशि गंगा बेसिन और यमुना नदी से माध्यम से गंगा सागर तक जाकर समुद्र में मिलती हैं। चंबल और सोन जैसी नदियां गंगा-यमुना की धारा को रफ्तार देती हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबका साथ-सबका विकास की भावना के साथ आगे बढ़ते हुए सिविल लाइन में आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडर्न लॉन्ड्री की सौगात दी गई है। वहीं, गुरंदी में मछली व्यवसाय से जुड़े लोगों की सुविधा के लिए 2.5 करोड़ रुपये की लागत से पक्के मत्स्य बाजार का लोकार्पण किया गया है। खुले में मछली बिकने से इसे नहीं खाने वालों को बड़ी कठिनाई होती है। दूसरी ओर, खाने वालों के लिए खानपान की शुद्धता पर असर पड़ता है।

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