Monday, November 2, 2026
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UP Election 2027: चुनाव से पहले RLD को बड़ा झटका, प्रदेश अध्यक्ष रामाशीष राय ने पार्टी से दिया इस्तीफा

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले राष्ट्रीय लोकदल (RLD) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने अपने पद के साथ-साथ राष्ट्रीय लोकदल की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना त्यागपत्र पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को भेजा है. इस्तीफे में डॉ. राय ने कई वैचारिक और नैतिक मुद्दों को आधार बनाया है. उन्होंने देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, लोकतंत्र और सामाजिक व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंताएं जाहिर की हैं.

जेपी आंदोलन से शुरू हुआ था राजनीतिक सफर

डॉ. रामाशीष राय ने अपने इस्तीफे में अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत का जिक्र भी किया है. उन्होंने बताया कि वर्ष 1974-75 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रभावित होकर उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा था. उस समय भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही जैसे मुद्दे आंदोलन के केंद्र में थे. उनका कहना है कि व्यवस्था में व्यापक बदलाव का जो सपना उस दौर में देखा गया था, वह आज भी पूरी तरह साकार नहीं हो पाया है.

लोकतंत्र और सामाजिक व्यवस्था पर चिंता

त्यागपत्र में डॉ. राय ने भारतीय लोकतंत्र की मौजूदा स्थिति पर भी सवाल उठाए. उनके मुताबिक राजनीति में धनबल और प्रभावशाली लोगों का असर लगातार बढ़ रहा है. वहीं जाति, उपजाति और संप्रदाय के आधार पर समाज में विभाजन की प्रवृत्ति भी मजबूत होती दिखाई दे रही है. उन्होंने इसे सामाजिक एकता और देश की समरसता के लिए चिंता का विषय बताया.

डॉ. राय ने किसानों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को भी अपने पत्र में प्रमुखता से उठाया. उन्होंने किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने और युवाओं के सामने रोजगार की समस्या का उल्लेख किया. शिक्षा और रोजगार को लेकर बढ़ती निराशा को उन्होंने समाज में असंतोष बढ़ने की एक बड़ी वजह बताया.

धनबल और परिवारवाद पर भी उठाए सवाल

RLD के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने राजनीति में बढ़ते धनबल और परिवारवाद पर भी निशाना साधा. उनका कहना है कि राजनीतिक जीवन में विचारधारा और सिद्धांतों की जगह आर्थिक ताकत और परिवार आधारित राजनीति का प्रभाव बढ़ रहा है. इससे लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है.

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के उस विचार का भी उल्लेख किया, जिसमें चुनाव और राजनीति में बढ़ते धनबल को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया गया था. डॉ. राय के अनुसार मौजूदा परिस्थितियों को देखकर यह चिंता आज और अधिक प्रासंगिक नजर आती है.

संविधान और संस्थाओं को लेकर जताई चिंता

डॉ. राय ने अपने इस्तीफे में संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर भी चिंता व्यक्त की. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके फैसले के पीछे वैचारिक और नैतिक कारण हैं. इसी आधार पर उन्होंने RLD के प्रदेश अध्यक्ष पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता दोनों से अलग होने का निर्णय लिया है. उन्होंने अपने पत्र में यह भी कहा कि व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश होता है.

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