Monday, November 2, 2026
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कटनी बाईपास पर बेखौफ पशु तस्करी का खेल? ट्रकों में ठूंसकर भेड़-बकरियों की ढुलाई, जिम्मेदारों की निगरानी पर गंभीर सवाल

खबर डिजिटल न्यूज़ रिपोर्टर /कटनी— कटनी-जबलपुर बाईपास से सुबह के समय बड़ी संख्या में ट्रकों के गुजरने को लेकर पशु परिवहन और कथित पशु तस्करी का मामला एक बार फिर चर्चा में है। स्थानीय स्तर से मिली जानकारी के मुताबिक, एक साथ करीब 10 से 12 ट्रकों में बड़ी संख्या में भेड़-बकरियों को कथित रूप से ठूंस-ठूंसकर भरकर ले जाया जा रहा है। आरोप है कि इस दौरान पशुओं के परिवहन से जुड़े निर्धारित नियमों और पशु क्रूरता से संबंधित प्रावधानों की अनदेखी की जा रही है।यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल अवैध परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पशुओं के साथ कथित अमानवीय व्यवहार और नियमों के उल्लंघन की जांच का विषय बन सकता है।

सुबह का वक्त, ट्रकों की कतार और जिम्मेदारों की निगरानी पर सवालस्थानीय सूत्रों का दावा है कि सुबह के समय बड़ी संख्या में ट्रक कटनी-जबलपुर बाईपास से होकर गुजरते हैं। इन वाहनों में भेड़-बकरियों को क्षमता के अनुरूप रखा गया है या नहीं, उनके लिए पर्याप्त जगह, हवा, पानी और आवश्यक व्यवस्था है या नहीं—इसकी जांच कौन कर रहा है, यह बड़ा सवाल है।

अगर एक साथ इतने वाहन पशुओं को लेकर गुजर रहे हैं, तो संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आखिर 10-12 ट्रकों का काफिला जांच एजेंसियों की नजर से कैसे गुजर जाता है?रीवा से तेलंगाना तक कथित नेटवर्क, कटनी बना रास्ता?

मिली जानकारी के अनुसार, कथित रूप से पशुओं को रीवा, सतना, नागौद, मैहर होते हुए कटनी और जबलपुर के रास्ते आगे हैदराबाद तथा तेलंगाना की ओर ले जाने की बात सामने आ रही है।इस पूरे मार्ग में पशुओं के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच, वाहनों की क्षमता, पशुओं की संख्या और परिवहन की वैधता की पड़ताल बेहद जरूरी है।

सवाल यह भी है कि यदि परिवहन वैध है तो संबंधित वाहनों के पास आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं? और यदि नियमों का उल्लंघन हो रहा है तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?जांच नाकों पर ‘सेटिंग’ का आरोप—क्या है सच्चाई?स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा जांच नाकों पर कथित मिलीभगत या ‘सेटिंग’ के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इतने गंभीर आरोपों के बाद जांच एजेंसियों के लिए इसकी निष्पक्ष जांच करना जरूरी हो जाता है।यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर लापरवाही, मिलीभगत या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

सवाल सीधा है—अगर सब कुछ नियमों के मुताबिक है तो फिर जांच से डर किस बात का? और अगर नियम टूट रहे हैं तो जिम्मेदार कार्रवाई से पीछे क्यों हट रहे हैं?जबलपुर के कथित दलालों की भूमिका की भी जांच जरूरीस्थानीय सूत्रों के हवाले से इस कथित नेटवर्क में जबलपुर क्षेत्र के कुछ दलालों की भूमिका होने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि इनके माध्यम से पशुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने की व्यवस्था की जाती है।हालांकि किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है।

इसलिए पुलिस और संबंधित विभागों को चाहिए कि वे पूरे नेटवर्क की कड़ियों की जांच करें—पशु कहां से लाए जा रहे हैं, किसके नाम पर खरीदे जा रहे हैं, किस वाहन से भेजे जा रहे हैं, वाहन मालिक कौन हैं और अंतिम गंतव्य तक इन्हें कौन प्राप्त कर रहा है।सिर्फ ट्रक पकड़ने से नहीं खुलेगा राज, नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना होगायदि वास्तव में बड़े स्तर पर पशुओं का अवैध या नियम विरुद्ध परिवहन हो रहा है तो केवल वाहन पकड़कर मामला समाप्त कर देना पर्याप्त नहीं होगा।

इसके पीछे काम करने वाले कथित बिचौलियों, वाहन मालिकों, सप्लायरों और खरीदारों की पूरी श्रृंखला की जांच आवश्यक है।कहां से पशु निकलते हैं?किसके आदेश पर ट्रक लोड होते हैं?किसके दस्तावेजों पर परिवहन होता है?कौन वाहन उपलब्ध कराता है?रास्ते में वाहनों की जांच कहां-कहां होती है?और आखिर इन पशुओं को किस गंतव्य तक पहुंचाया जाता है?

इन सवालों के जवाब सामने आए तो कथित नेटवर्क की पूरी तस्वीर साफ हो सकती है।पशुओं की हालत पर भी उठे गंभीर सवाललंबी दूरी तक बड़ी संख्या में पशुओं को एक ही वाहन में भरकर ले जाने के आरोपों के बीच सबसे बड़ा मुद्दा पशुओं की सुरक्षा और उनके साथ व्यवहार का है। यदि वाहन में निर्धारित क्षमता से अधिक पशु पाए जाते हैं या परिवहन के दौरान आवश्यक व्यवस्थाएं नहीं होतीं, तो यह संबंधित नियमों के उल्लंघन का मामला बन सकता है।

ऐसे में प्रशासन और पशुपालन विभाग को मौके पर वाहनों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लानी चाहिए।जिम्मेदार विभाग आखिर कब जागेंगे?स्थानीय लोगों का कहना है कि पशुओं के परिवहन का यह कथित सिलसिला लंबे समय से जारी है। यदि यह दावा सही है तो सवाल उठना लाजिमी है कि इतने समय से संबंधित विभागों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?क्या विभाग के पास बाईपास और प्रमुख मार्गों से गुजरने वाले पशु परिवहन वाहनों की निगरानी की कोई प्रभावी व्यवस्था है?

क्या नियमित रूप से वाहनों की जांच की जाती है?क्या पशुओं की संख्या और वाहन की क्षमता का मिलान किया जाता है?क्या दस्तावेजों की जांच होती है?

और सबसे महत्वपूर्ण—अब तक कितने मामलों में कार्रवाई की गई?प्रशासन चाहे तो एक दिन में खुल सकती है पूरी तस्वीरयदि जिला प्रशासन, पुलिस, पशुपालन विभाग और परिवहन विभाग संयुक्त रूप से कटनी-जबलपुर बाईपास तथा जिले से गुजरने वाले प्रमुख मार्गों पर अचानक जांच अभियान चलाएं तो कथित नेटवर्क की वास्तविकता सामने आ सकती है।

सुबह के समय निकलने वाले संदिग्ध वाहनों की जांच, वाहन दस्तावेजों का सत्यापन, पशुओं की संख्या की गणना और परिवहन संबंधी नियमों का पालन हो रहा है या नहीं—इन सभी बिंदुओं की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।अब देखना यह है—कार्रवाई होगी या आरोप फाइलों में दब जाएंगे?कटनी बाईपास से कथित रूप से बड़ी संख्या में भेड़-बकरियों को ट्रकों में भरकर ले जाने की जानकारी ने प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यदि आरोप निराधार हैं तो जिम्मेदार विभाग जांच कर स्थिति स्पष्ट करें। और यदि नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।क्योंकि सवाल सिर्फ भेड़-बकरियों के परिवहन का नहीं है—

सवाल यह है कि क्या कटनी की सड़कों से होकर कोई कथित संगठित पशु तस्करी नेटवर्क बेखौफ गुजर रहा है?अब निगाह पुलिस और प्रशासन पर है। क्या जिम्मेदार इस कथित नेटवर्क की जड़ तक पहुंचेंगे, जांच नाकों की भूमिका की पड़ताल करेंगे और पशु क्रूरता के आरोपों की सच्चाई सामने लाएंगे, या फिर ट्रकों का यह सिलसिला इसी तरह बेखौफ जारी रहेगा?

कटनी से सौरभ श्रीवास्तव की रिपोर्ट मो. 9131308097

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