Tuesday, November 3, 2026
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IAS Neha Marvya: 14 साल तक दीवारों में कैद… फिर सुर्खियों में IAS नेहा मारव्या, पेन डाउन हड़ताल से मचा हड़कंप

मध्य प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी नेहा मारव्या एक बार फिर विवादों के कारण चर्चा में हैं. शुक्रवार को जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारियों ने उनके खिलाफ पेन डाउन हड़ताल की. अधिकारियों और कर्मचारियों ने आदि भवन परिसर में एकत्र होकर नेहा मारव्या के विरोध में नारे लगाए और पूरे दिन काम नहीं किया.

कर्मचारियों का आरोप है कि नेहा मारव्या का व्यवहार उनके प्रति ठीक नहीं है. उन पर अभद्र तरीके से बातचीत करने, केंद्रीय योजनाओं की राशि रोकने, कर्मचारियों के इंक्रीमेंट में अड़चन डालने और बार-बार नोटिस जारी कर निलंबन की चेतावनी देने जैसे आरोप लगाए गए हैं. विरोध बढ़ने के बाद नेहा मारव्या ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया.

पीवीटीजी महिलाओं की राशि अटकने का आरोप

विभागीय अधिकारियों के मुताबिक आहार अनुदान योजना के तहत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह यानी PVTG में शामिल बैगा, सहरिया और भारिया समुदाय की करीब 2.40 लाख महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये की सहायता दी जाती है.

अधिकारियों का दावा है कि अगस्त महीने की लगभग 30 करोड़ रुपये की राशि अब तक लाभार्थियों के खातों में नहीं पहुंची है. इस मामले को लेकर मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग ने भी गंभीरता जताई है और मुख्य सचिव से कार्रवाई की मांग की है.

आयोग और अधिकारी संघ ने भी उठाए सवाल

मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रामलाल रौतेल ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को पत्र भेजकर नेहा मारव्या के खिलाफ शिकायत की है. पत्र में केंद्रीय योजनाओं के प्रभावित होने का हवाला देते हुए उन्हें पद से हटाने की मांग की गई है.

वहीं विभाग के राजपत्रित अधिकारी संघ ने भी मुख्य सचिव को पत्र लिखकर संचालक के व्यवहार पर आपत्ति जताई है. कर्मचारियों का कहना है कि विभाग में काम का माहौल प्रभावित हो रहा है और उनकी समस्याओं पर ध्यान दिया जाना जरूरी है.

पहले भी अपने बयान को लेकर चर्चा में रहीं

IAS नेहा मारव्या इससे पहले भी अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में रह चुकी हैं. कुछ समय पहले फील्ड पोस्टिंग नहीं मिलने से नाराजगी जताते हुए उन्होंने IAS अधिकारियों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में अपनी बात रखी थी.

उन्होंने लिखा था कि 14 साल की नौकरी के दौरान उन्हें एक बार भी फील्ड पोस्टिंग नहीं मिली. उनका कहना था कि वह केवल कार्यालय आती हैं और वापस चली जाती हैं. उन्होंने अपनी स्थिति की तुलना दीवारों के बीच कैद होने से की थी.

कलेक्टरी नहीं मिलने पर छलका था दर्द

यह मामला तब सामने आया था जब IAS ज्ञानेश्वर पाटिल ने एक कॉन्सेप्ट नोट साझा करते हुए सुझाव दिया था कि अधिकारियों को 14 साल की सेवा में करीब चार साल कलेक्टर के रूप में काम करने का अवसर मिलना चाहिए.

इस पर नेहा मारव्या ने अपनी पोस्टिंग का अनुभव साझा किया. उन्होंने बताया था कि उन्हें साढ़े तीन साल तक पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में उप सचिव के तौर पर पदस्थ रखा गया. इसके बाद करीब ढाई साल से राजस्व विभाग में उप सचिव की जिम्मेदारी है.

नेहा ने उस समय अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा था कि लंबे समय से उन्हें फील्ड में काम करने का मौका नहीं मिला. इसी वजह से उनका यह बयान सोशल मीडिया और प्रशासनिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बना था.

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