भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ गुजरात और महाराष्ट्र के बाद मध्य प्रदेश में भी एनालॉग पनीर की बिक्री पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्रदेशभर में एनालॉग पनीर, एनालॉग मावा और अन्य मिलावटी दुग्ध उत्पादों के खिलाफ लगातार छापामार कार्रवाई की जा रही है। अब तक अलग-अलग कार्रवाइयों में 8,135 किलो खाद्य सामग्री जब्त की जा चुकी है। सरकार के इस कदम के बाद केवल स्थानीय दुकानों और प्रतिष्ठानों में मिलने वाले पनीर की ही जांच नहीं की जा रही, बल्कि ब्रांडेड कंपनियों के पनीर के नमूने भी लिए जा रहे हैं। विभाग का फोकस यह पता लगाने पर है कि बाजार में बिक रहा उत्पाद निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं।
असली और एनालॉग पनीर में क्या अंतर?
एनालॉग पनीर देखने में सामान्य पनीर जैसा ही दिखाई देता है। केवल देखकर या स्वाद के आधार पर दोनों में अंतर करना मुश्किल हो सकता है। खाद्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक दूध से बने असली पनीर को हाथ से मसलने पर वह आसानी से टूट जाता है, जबकि एनालॉग पनीर में अधिक खिंचाव और चिपचिपापन पाया जा सकता है। दूध से तैयार पनीर की कीमत जहां करीब 350 से 400 रुपये प्रति किलो तक हो सकती है, वहीं एनालॉग पनीर करीब 150 रुपये प्रति किलो तक उपलब्ध होने की बात सामने आई है।
क्या होता है एनालॉग पनीर?
फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट के अधिकारियों के मुताबिक एनालॉग पनीर वास्तविक डेयरी उत्पाद नहीं होता। इसे तैयार करने में दूध के बजाय या दूध के साथ वनस्पति तेल, स्टार्च, सोया मिल्क, मिल्क पाउडर, प्रिजर्वेटिव और अन्य गैर-दुग्ध सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे उत्पाद को सामान्य पनीर की तरह दिखने वाला बनाया जाता है, लेकिन इसकी संरचना और पोषण संबंधी गुण पारंपरिक दूध से बने पनीर से अलग होते हैं।
घर पर ऐसे पहचानें असली और नकली पनीर
खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की ओर से लोगों को पनीर और मावा की प्राथमिक जांच के कुछ आसान तरीके भी बताए जा रहे हैं।
हाथ से मसलकर देखें:
दूध से बना पनीर हाथ से दबाने या मसलने पर अपेक्षाकृत आसानी से टूट सकता है। एनालॉग पनीर में अधिक खिंचाव और चिपचिपापन महसूस हो सकता है।
तवे पर गर्म करके जांचें:
पनीर का एक छोटा टुकड़ा गर्म तवे पर रखकर देखा जा सकता है। अधिकारियों के मुताबिक एनालॉग पनीर गर्म होने पर तेल छोड़ सकता है और उसमें खिंचाव बढ़ सकता है।
आयोडीन से जांच:
पनीर के छोटे टुकड़े पर आयोडीन की कुछ बूंदें डालकर भी प्राथमिक स्तर पर मिलावट की जांच की जा सकती है। यदि पनीर में कुछ प्रकार की स्टार्च आधारित मिलावट मौजूद है तो उसका रंग नीला या गहरा हो सकता है। हालांकि घरेलू जांच केवल प्रारंभिक संकेत देती है; किसी उत्पाद के सुरक्षित या मानक होने की पुष्टि के लिए प्रयोगशाला परीक्षण ही निर्णायक माना जाना चाहिए।
असली पनीर और एनालॉग पनीर में मुख्य अंतर
असली पनीर: दूध को अम्लीय पदार्थ की मदद से फाड़कर और जमाकर तैयार किया जाता है। इसमें वसा का मुख्य स्रोत दूध होता है और यह पारंपरिक डेयरी उत्पाद है।
एनालॉग पनीर: इसमें वनस्पति तेल, स्टार्च, सोया आधारित सामग्री, प्रिजर्वेटिव या अन्य गैर-दुग्ध अवयवों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसकी संरचना और पोषण पारंपरिक दूध से बने पनीर से अलग होती है।
खाद्य विभाग की लगातार कार्रवाई के बाद अब बाजार में बिकने वाले पनीर और अन्य दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर निगरानी और सैंपलिंग और अधिक बढ़ने की संभावना है।
