Wednesday, November 4, 2026
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आज़ादी के जश्न में अनुशासन और बुनियादी ज़रूरतों की अनदेखी पर उठे सवाल

डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ 15 अगस्त का दिन हर भारतीय के लिए गर्व और उल्लास का दिन होता है। लेकिन इस राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर डिंडौरी जिले के दो अलग-अलग हिस्सों से आई तस्वीरों ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि एक ओर जहाँ गाँव के बच्चे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ज़िम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपनी प्राथमिकताओं को भूल चुके हैं।

​ज़मीनी हकीकत – कीचड़ से भरा रास्ता और बच्चों का उत्साह

​बरगई ग्राम पंचायत में देश के प्रति बच्चों के प्रेम और उत्साह की तस्वीर तब धुंधली पड़ गई, जब उन्हें झंडा फहराने और प्रभात फेरी निकालने के लिए कीचड़ से होकर गुज़ारना पड़ा। पंचायत और स्कूल परिसर की साफ-सफाई न होने से चारों तरफ जलभराव और गंदगी फैली हुई थी।

​सुविधाओं का अभाव

बच्चों के मन में देशप्रेम का जज़्बा तो पूरा था, लेकिन गाँव का बुनियादी ढाँचा इस ऐतिहासिक दिन भी बदहाल दिखा।ग्रामीणों का कहना है कि क्या राष्ट्रीय पर्व जैसे अवसरों के लिए भी ग्राम पंचायत परिसर को साफ और सुरक्षित नहीं बनाया जा सकता था?

​वहीं दूसरी तरफ समनापुर के महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय से एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने प्रशासनिक मर्यादा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। ध्वजारोहण कार्यक्रम संपन्न होने के तुरंत बाद दफ़्तर परिसर में ही महिला कर्मचारियों द्वारा फिल्मी गानों पर डांस कर रील बनाई गई।समनापुर स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यालय परिसर में महिला कर्मचारियों द्वारा फिल्मी गाने पर रील बनाई गई: “आज रुसवा तेरी गलियों में मोहब्बत होगी”

​शासकीय संपत्ति का प्रयोग

वीडियो में साफ तौर पर विभाग की इमारत दिख रही है, जिसे निजी सोशल मीडिया रील्स के लिए बैकग्राउंड की तरह इस्तेमाल किया गया। जिस विभाग पर महिलाओं और बच्चों के विकास, पोषण और आंगनवाड़ी केंद्रों के संचालन की बड़ी ज़िम्मेदारी है, वहाँ से जन-जागरूकता के संदेश की जगह फिल्मी गानों पर बने वीडियो सामने आना लोगों को अखर रहा है।

​बदहाल इमारत और अनदेखी की कहानी

​वीडियो में केवल कर्मचारियों का व्यवहार ही नहीं, बल्कि उस सरकारी इमारत की जर्जर हालत भी साफ नज़र आ रही है। अगर इसी परिसर का उपयोग स्वच्छता, पौधारोपण या कुपोषण मुक्त समाज का संदेश देने के लिए किया जाता, तो शायद विभाग की एक सकारात्मक और अच्छी छवि सामने आती।

​अब यह देखना अहम होगा कि ज़िले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी इस पूरे मामले को किस रूप में लेते हैं। क्या बरगई में रास्तों और परिसरों की दशा सुधरेगी और क्या समनापुर में हुई इस तरह की लापरवाही पर कोई कड़ा संदेश दिया जाएगा?

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