मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में एक बार फिर फ्लू जैसे लक्षण वाले वायरस को लेकर चिंता बढ़ गई है. शहर में H3N2 वेरिएंट के मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन सतर्क हो गया है. विशेषज्ञों के मुताबिक, यह वायरस खास तौर पर बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा प्रभावित कर रहा है. अब तक भोपाल में इसके चार मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं. हालांकि राहत की बात यह है कि ज्यादातर मामलों में संक्रमण का असर तीन से पांच दिन के भीतर कम हो रहा है.
H3N2 में दिख रहे हैं ये लक्षण
डॉक्टर्स के मुताबिक H3N2 से संक्रमित मरीजों में फ्लू जैसे कई लक्षण नजर आ रहे हैं. इनमें गले में दर्द, लगातार तेज खांसी, नाक बहना और सांस लेने में परेशानी शामिल है. कुछ मरीजों में स्वाद और सुगंध महसूस करने की क्षमता कम होने की शिकायत भी सामने आ रही है.
इस वायरस के तीन प्रमुख लक्षण फिलहाल ज्यादा देखने को मिल रहे हैं. कुछ लोगों को बिना बुखार के ही ठंड लग रही है. वहीं कई मरीज ठंड या कंपकंपी के साथ बुखार से परेशान हैं. इसके अलावा गले में दर्द के साथ लगातार खांसी भी एक आम लक्षण बताया जा रहा है.
अब तक 4 मरीज मिले पॉजिटिव
जीएमसी के श्वांस रोग विभाग के प्रमुख डॉ. लोकेन्द्र दवे के मुताबिक H3N2 पिछले करीब चार साल से बारिश के मौसम में सक्रिय होता रहा है. इस बार भी इसके मामले सामने आए हैं. गंभीर लक्षण वाले मरीजों को ही जांच के लिए निजी अस्पतालों में भेजा जा रहा है. इस साल अब तक चार लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है.
डॉ. दवे का कहना है कि पॉजिटिव मामले मिलने के बाद केवल टेस्ट पर निर्भर रहने के बजाय मरीज के लक्षणों के आधार पर इलाज करना भी जरूरी है. साथ ही जांच जारी रहनी चाहिए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वायरस का संक्रमण समुदाय में किस स्तर तक फैल रहा है.
3 से 5 दिन में कम हो रहा संक्रमण
विशेषज्ञों के अनुसार इस बार सामने आए H3N2 वेरिएंट का असर अन्य वेरिएंट की तुलना में अपेक्षाकृत हल्का है. ज्यादातर मरीजों में तीन से पांच दिन के भीतर इसके लक्षण कम होने लगते हैं. हालांकि कुछ मामलों में संक्रमण का असर पांच दिन से ज्यादा समय तक भी बना रह सकता है.
भोपाल-इंदौर में H3N2 क्यों सक्रिय?
गांधी मेडिकल कॉलेज के श्वांस रोग विशेषज्ञ डॉ. निशांत श्रीवास्तव ने बताया कि देश के कुछ अन्य राज्यों में H1N1 फ्लू वेरिएंट सक्रिय है. वहीं मध्यप्रदेश में मौसम और जलवायु की परिस्थितियों के कारण भोपाल और इंदौर समेत कई इलाकों में H3N2 का असर ज्यादा देखने को मिल रहा है.
