खबर डिजिटल न्यूज़ कटनी— रक्षाबंधन का त्योहार नजदीक है और शहर के मिष्ठान भंडारों से लेकर नाश्ते की दुकानों तक मिठाइयों की तैयारियां जोर पकड़ने लगी हैं। ऐसे समय में मिथ्याछाप कलाकंद के मामले में ₹40 हजार के अर्थदंड की कार्रवाई ने खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और त्योहारों के दौरान होने वाली जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।बरही के पुराने बस स्टैंड स्थित सुयश स्वीट्स के विरुद्ध न्याय निर्णायक अधिकारी एवं अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी नीलांबर मिश्रा ने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत कार्रवाई करते हुए ₹40 हजार का आर्थिक दंड लगाया है।
मामले में कलाकंद का नमूना राज्य खाद्य प्रयोगशाला की जांच में मिथ्याछाप पाया गया था।दीपावली में लिया था नमूना, अब सामने आया फैसलाजानकारी के अनुसार खाद्य सुरक्षा अधिकारी ब्रजेश कुमार विश्वकर्मा ने 21 अक्टूबर 2022 को दीपावली के मद्देनजर सुयश स्वीट्स का निरीक्षण किया था।
दुकान पर खोवा, कलाकंद सहित विभिन्न खाद्य पदार्थ बिक्री के लिए रखे मिले थे। मिलावट की आशंका पर खोवा और कलाकंद के नमूने लेकर जांच के लिए राज्य खाद्य प्रयोगशाला भेजे गए। जांच रिपोर्ट में कलाकंद का नमूना मिथ्याछाप पाया गया।
सुनवाई के दौरान दुकान संचालक सुयश अग्रवाल की ओर से आरोपों से इनकार करते हुए विभिन्न दस्तावेजों और नमूना कार्रवाई पर आपत्तियां दर्ज कराई गईं। हालांकि न्यायालय ने उपलब्ध दस्तावेजों, खाद्य सुरक्षा अधिकारी के बयान और प्रयोगशाला रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद प्रकरण में पर्याप्त साक्ष्य पाए।
₹40 हजार का अर्थदंड, 30 दिन की मोहलतप्रकरण में खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 26(2)(ii), सहपठित धारा 52 का उल्लंघन पाया गया। इसके आधार पर धारा 51 एवं 58 के तहत ₹40 हजार का आर्थिक दंड लगाया गया है। संबंधित संचालक को यह राशि 30 दिवस के भीतर निर्धारित ट्रेजरी चालान के माध्यम से जमा कर चालान की प्रति न्यायालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। राशि जमा नहीं करने पर धारा 96 के तहत लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
अब सवाल—रक्षाबंधन से पहले कितनी दुकानों की होगी जांच?यह कार्रवाई ऐसे समय सामने आई है, जब रक्षाबंधन को लेकर बाजारों में मिठाइयों की मांग बढ़ने वाली है। त्योहारों के दौरान बड़ी मात्रा में खोवा, मावा, कलाकंद, बर्फी, पेड़ा और रंगीन मिठाइयों का निर्माण और बिक्री होती है। ऐसे में गुणवत्ता से समझौता होने की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
चमकदार और आकर्षक रंगों वाली मिठाइयां भले ही ग्राहकों को अपनी ओर खींचें, लेकिन यदि इनमें घटिया या मानक के विपरीत खाद्य सामग्री का इस्तेमाल हुआ तो यही मिठास लोगों की सेहत पर भारी पड़ सकती है।
खोवा मंडी से लेकर मिठाई दुकानों तक हो जांचत्योहार से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग को शहर की मिष्ठान दुकानों, नाश्ता सेंटरों, मिठाई निर्माण प्रतिष्ठानों और खोवा मंडी में व्यापक जांच अभियान चलाने की जरूरत है। खासकर बड़ी मात्रा में आने वाले खोवा और मावा की गुणवत्ता की जांच होनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं से बड़ी मात्रा में त्योहारों की मिठाइयां तैयार होती हैं।
जरूरत इस बात की है कि विभाग केवल शिकायत आने का इंतजार न करे, बल्कि त्योहार से पहले ही सक्रिय होकर सैंपलिंग और निरीक्षण अभियान चलाए।
जहां भी गुणवत्ता में कमी, मिलावट या नियमों की अनदेखी मिले, वहां तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाए।त्योहार की मिठास में मिलावट का जहर न घुलेइसके लिए रक्षाबंधन से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की सक्रियता सबसे जरूरी है।
अब देखना होगा कि ₹40 हजार के अर्थदंड की कार्रवाई के बाद विभाग शहर के बाकी मिष्ठान प्रतिष्ठानों पर भी कितनी सख्ती दिखाता है।
