Tuesday, November 3, 2026
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Raksha Bandhan 2026: इस समय भूलकर भी न बांधें राखी, जानें शुभ मुहूर्त और राहु काल का समय

रक्षाबंधन भाई और बहन के बीच प्यार, विश्वास और अपनापन दर्शाने वाला महत्वपूर्ण त्योहार है. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना करती हैं. वहीं भाई भी बहनों की हर परिस्थिति में साथ देने और उनकी रक्षा करने का संकल्प लेते हैं.

रक्षाबंधन की तारीख और राखी बांधने के शुभ समय को लेकर हर साल लोगों में खास उत्सुकता रहती है. इस बार भी पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं और लोग यह जानना चाहते हैं कि राखी बांधने के लिए कौन सा समय सबसे उपयुक्त रहेगा.

महंत रोहित शास्त्री ने बताई महत्वपूर्ण जानकारी

रक्षाबंधन की तिथि, शुभ मुहूर्त, भद्रा और पूजा से जुड़ी जानकारी को लेकर श्री कैलख ज्योतिष एवं वैदिक संस्थान, जम्मू-कश्मीर के अध्यक्ष और स्टेट अवॉर्डी महंत रोहित शास्त्री से जानकारी ली गई.

महंत रोहित शास्त्री के अनुसार हिंदू पंचांग में रक्षाबंधन का विशेष महत्व माना गया है. राखी बांधते समय शुभ समय का ध्यान रखना जरूरी होता है. साथ ही भद्रा काल को भी महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए इस अवधि में राखी बांधने से बचने की परंपरा रही है.

28 अगस्त को मनाया जाएगा रक्षाबंधन

महंत रोहित शास्त्री ने बताया कि इस वर्ष रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त को मनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि राखी बांधने से पहले पंचांग में दिए गए समय और संबंधित मुहूर्त का ध्यान रखना चाहिए, ताकि धार्मिक परंपराओं के अनुसार पर्व की रस्म पूरी की जा सके.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रक्षाबंधन सिर्फ पूजा या धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित पर्व नहीं है. यह भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम और विश्वास को मजबूत करने का अवसर भी है. परिवार में इस दिन विशेष उत्साह देखने को मिलता है और बहनें भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके उज्ज्वल भविष्य की प्रार्थना करती हैं.

राहु काल में राखी बांधने से बचने की सलाह

महंत रोहित शास्त्री के मुताबिक 28 अगस्त को सुबह 10 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 22 मिनट तक राहु काल रहेगा. उन्होंने सलाह दी कि इस अवधि में बहनों को भाइयों की कलाई पर राखी नहीं बांधनी चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ कार्यों के लिए राहु काल को उपयुक्त नहीं माना जाता है.

इसलिए राखी बांधने की योजना बना रहे परिवारों को दिन के अन्य शुभ समय को प्राथमिकता देने की सलाह दी गई है.

चंद्र ग्रहण को लेकर भी किया स्पष्ट

रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण को लेकर भी लोगों के बीच कई तरह की चर्चाएं हैं. इस पर महंत रोहित शास्त्री ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. ऐसे में इसका भारतीय धार्मिक परंपराओं के अनुसार कोई विशेष प्रभाव नहीं माना जाएगा.

उन्होंने कहा कि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण मंदिरों के कपाट बंद करने की आवश्यकता नहीं होगी. साथ ही गर्भवती महिलाओं को लेकर भी किसी तरह के डर या भ्रम में रहने की जरूरत नहीं है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अनावश्यक आशंकाओं पर ध्यान न दें और पर्व को श्रद्धा तथा खुशी के साथ मनाएं.

पूजा और राखी की तैयारी में इन बातों का रखें ध्यान

रक्षाबंधन के दिन बहनें सबसे पहले पूजा की थाली तैयार करती हैं. इसमें राखी, रोली, अक्षत, मिठाई और दीपक जैसी पूजन सामग्री रखी जाती है. भाई को तिलक लगाने के बाद आरती की जाती है और फिर उसकी कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा जाता है. इसके बाद भाई अपनी बहन को उपहार देकर उसके सुखी और सुरक्षित जीवन का संकल्प लेता है.

रक्षाबंधन की तिथि, राखी बांधने के शुभ समय, भद्रा और पूजा से जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए पंचांग तथा योग्य ज्योतिषाचार्य की सलाह को प्राथमिकता देना उचित रहेगा. पर्व का मूल उद्देश्य भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, सम्मान और विश्वास को और मजबूत करना है.

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