Tuesday, November 3, 2026
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MP News: सीएम मोहन यादव का पहला चिंतन शिविर…. सितंबर में मंत्रियों और अफसरों के साथ दो दिन होगा मंथन

अगले ढाई साल का बनेगा रोडमैप

भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहली बार अपनी सरकार का चिंतन शिविर आयोजित करने जा रहे हैं। सितंबर में प्रस्तावित दो दिवसीय शिविर में मुख्यमंत्री मंत्रियों के साथ सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षा करेंगे और आने वाले ढाई वर्षों के लिए नई कार्ययोजना तैयार करने पर मंथन होगा। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद चिंतन शिविर की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

मंत्रियों के समूह बनाकर होगी विभागों की समीक्षा
प्रस्तावित चिंतन शिविर में अलग-अलग विभागों के मंत्रियों के छोटे-छोटे समूह बनाए जाने की योजना है। प्रत्येक समूह में तीन से चार विभागों से जुड़े मंत्री शामिल हो सकते हैं। इन बैठकों में सरकार के पिछले ढाई वर्षों के कामकाज, प्रमुख योजनाओं की प्रगति और विभागीय उपलब्धियों की समीक्षा की जाएगी। साथ ही सरकार के संकल्प पत्र में किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में हुई प्रगति पर भी चर्चा होगी। अगले ढाई वर्षों में सरकार की प्राथमिकताएं क्या होंगी और योजनाओं को अधिक प्रभावी तरीके से कैसे लागू किया जाए, इसका रोडमैप भी तैयार किया जाएगा।

जिलों की स्थिति पर भी होगा मंथन
चिंतन शिविर को केवल मंत्रालयों और विभागों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इसमें कलेक्टर, संभागायुक्त और विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारियों की भी भागीदारी रहेगी। मुख्यमंत्री की मंशा है कि मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा की जाए। जिलों में चल रहे विकास कार्यों, स्थानीय समस्याओं और प्रशासनिक चुनौतियों को लेकर मंत्री अधिकारियों से सीधे सवाल-जवाब कर सकेंगे। इससे सरकार को योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति समझने में मदद मिलेगी।

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अगले साल से शुरू होगा चुनावी दौर
चिंतन शिविर में आगामी चुनावों को लेकर भी रणनीति तैयार की जाएगी। वर्ष 2027 में मध्यप्रदेश में नगरीय निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं। इसके बाद त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव भी होंगे। ऐसे में सरकार शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की अलग-अलग जरूरतों को ध्यान में रखते हुए योजनाओं के क्रियान्वयन और नई प्राथमिकताओं पर मंथन करेगी। इसके अलावा न्यायालय के आदेश के बाद होने वाले छात्र संघ चुनाव, सहकारी संस्थाओं, कृषि मंडियों और जल उपभोक्ता संस्थाओं के चुनाव भी सरकार के सामने महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती के रूप में होंगे। चिंतन शिविर में इन चुनावों और उनसे जुड़े संभावित समीकरणों पर भी रणनीति तैयार किए जाने की संभावना है।

चिंतन शिविर के बाद बदल सकते हैं प्रभार के जिले
मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में बदलाव का मुद्दा भी चिंतन शिविर के दौरान चर्चा का विषय बन सकता है। लंबे समय से कई मंत्री अपने प्रभार के जिलों को बदलने की मांग कर रहे हैं। कुछ मंत्रियों को ऐसे जिलों का प्रभार मिला हुआ है, जिनकी दूरी उनके विधानसभा क्षेत्रों या निवास स्थान से 500 किलोमीटर से लेकर करीब एक हजार किलोमीटर तक है। दूरी अधिक होने के कारण कई मंत्री अपने प्रभार वाले जिलों में नियमित प्रवास नहीं कर पा रहे हैं। मुख्यमंत्री और संगठन की ओर से जिलों में सक्रियता बढ़ाने के निर्देश दिए जाने के बावजूद कुछ मंत्रियों की दिलचस्पी अपेक्षित स्तर पर नहीं दिख रही है। ऐसे में चिंतन शिविर के बाद मंत्रियों के प्रभार वाले जिलों में फेरबदल किया जा सकता है।

खर्च बचाने के लिए भोपाल में ही होगा आयोजन
आमतौर पर सरकारों के चिंतन शिविर राजधानी से दूर किसी शांत और एकांत स्थान पर आयोजित किए जाते रहे हैं। लेकिन इस बार मुख्यमंत्री ने आर्थिक बचत को ध्यान में रखते हुए शिविर भोपाल में ही आयोजित करने का सुझाव दिया है। राजधानी से बाहर आयोजन करने पर मंत्रियों और बड़ी संख्या में अधिकारियों के आने-जाने, ठहरने और अन्य व्यवस्थाओं पर काफी खर्च होता है। भोपाल में आयोजन होने से मंत्री और अधिकारी रात्रि विश्राम के लिए अपने घर जा सकेंगे। इससे आवास और परिवहन सहित अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाले अतिरिक्त खर्च में कमी आएगी।

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शिवराज सरकार में भी होते रहे हैं चिंतन शिविर
मध्यप्रदेश में चिंतन शिविरों की परंपरा नई नहीं है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने कार्यकाल के दौरान मंत्रियों के साथ ऐसे शिविर आयोजित करते रहे हैं। वर्ष 2022 में पचमढ़ी में आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर में शिवराज कैबिनेट ने सरकार के कामकाज के साथ 2023 के विधानसभा चुनाव की रणनीति पर भी मंथन किया था।अब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में होने वाला यह चिंतन शिविर सरकार के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें विभागीय प्रदर्शन, संकल्प पत्र के वादे, योजनाओं की प्रगति, जिलों की चुनौतियों और अगले ढाई वर्षों की कार्ययोजना के साथ ही 2027 से शुरू होने वाले चुनावी दौर की रणनीति पर भी मंथन होगा।

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