भारत ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को गिराए जाने की खबरों पर गंभीर चिंता जताई है. भारत सरकार ने इस घटना की निंदा करते हुए पाकिस्तान के अधिकारियों से पूरे मामले की तत्काल जांच कराने की मांग की है. मामला नारोवाल जिले के सिराज गांव में स्थित एक करीब 100 साल पुराने हिंदू पूजा स्थल से जुड़ा है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भारत ने मंदिर में तोड़फोड़ की खबरों को गंभीरता से लिया है. उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदाय के इतने पुराने धार्मिक स्थल को नुकसान पहुंचाए जाने की घटना चिंताजनक है.
भारत ने मंदिर तोड़े जाने पर जताई नाराजगी
रणधीर जायसवाल के मुताबिक, भारत ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को नुकसान पहुंचाए जाने की खबरों की स्पष्ट रूप से निंदा करता है. विदेश मंत्रालय ने खास तौर पर इस बात पर चिंता जताई कि स्थानीय प्रशासन कथित तौर पर इस धार्मिक स्थल की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सका.
भारत का कहना है कि इस तरह की घटनाएं पाकिस्तान में रहने वाले अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा और उनके धार्मिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं. धार्मिक स्थलों की सुरक्षा करना संबंधित प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही चिंता का विषय है.
मंदिर गिराने की वजह को लेकर अलग-अलग दावे
यह मंदिर लाहौर से करीब 130 किलोमीटर दूर सिराज गांव में स्थित बताया जा रहा है. जानकारी के अनुसार, 21 अगस्त को यह 100 साल से अधिक पुराना धार्मिक स्थल गिरा दिया गया.
हालांकि, मंदिर के ढहने की वजह को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं. कुछ अल्पसंख्यक संगठनों का आरोप है कि धार्मिक कट्टरपंथियों ने मंदिर की जमीन को पास स्थित एक मदरसे की जमीन में मिलाने के उद्देश्य से इसे निशाना बनाया. इन संगठनों ने इस घटना को सुनियोजित कार्रवाई बताया है.
वहीं पाकिस्तान के इवैक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड यानी ETPB की ओर से अलग दावा किया गया है. बोर्ड के अनुसार, मंदिर की इमारत भारी बारिश के कारण गिर गई थी. ऐसे में घटना की वास्तविक वजह को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
भारत ने कहा है कि धार्मिक स्थल की सुरक्षा में प्रशासन की कथित विफलता को हल्के में नहीं लिया जा सकता. विदेश मंत्रालय के अनुसार, ऐसी घटनाएं पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े पुराने सवालों को फिर सामने लाती हैं.
अब भारत की मांग है कि पाकिस्तान सरकार पूरे मामले की निष्पक्ष और तत्काल जांच कराए. साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि मंदिर को किस परिस्थिति में नुकसान पहुंचा और क्या इसे गिराने के पीछे किसी तरह की साजिश या लापरवाही जिम्मेदार थी.
