Tuesday, November 3, 2026
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एमपी में IAS नेहा मारव्या सिंह का फिर तबादला… एक साल में तीसरी बार ट्रांसफर!

तीन अहम जिम्मेदारियों से हटाया गया

भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश में 2011 बैच की आईएएस अधिकारी नेहा मारव्या सिंह का एक बार फिर तबादला किया गया है। सरकार ने उन्हें आदिम जाति क्षेत्रीय विकास योजनाएं, आदिम जाति अनुसंधान एवं विकास संस्थान और रोजगार एवं प्रशिक्षण परिषद जैसी तीन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया है। अब उन्हें अजजा वित्त एवं विकास निगम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बताया जा रहा है कि जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों में नाराजगी के बाद सरकार ने यह प्रशासनिक बदलाव किया है। नेहा मारव्या सिंह का एक साल के भीतर यह तीसरा तबादला बताया जा रहा है। इस दौरान उन्हें डिंडौरी कलेक्टर के पद से भी हटाया जा चुका है।

8 महीने में ही डिंडौरी कलेक्टर पद से हटाया गया
नेहा मारव्या सिंह 2011 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। उनके प्रशासनिक कार्यकाल के दौरान कई मौकों पर विवाद और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। कलेक्टर बनने की इच्छा को लेकर भी वह चर्चा में रही थीं। बताया जाता है कि उन्होंने आईएएस एसोसिएशन के ग्रुप में पोस्ट कर कलेक्टर नहीं बनाए जाने पर अपनी नाराजगी जाहिर की थी। इसके बाद सरकार ने उन्हें डिंडौरी जिले की कमान सौंपी थी। हालांकि, करीब आठ महीने बाद ही उन्हें कलेक्टर पद से हटा दिया गया। उस समय पूर्व मंत्री ओपी धुर्वे समेत कुछ नेताओं के साथ विवाद को उनके हटाए जाने की वजहों से जोड़कर देखा गया था।

जनजातीय कार्य विभाग में भी बढ़ी नाराजगी
डिंडौरी के बाद जनजातीय कार्य विभाग में जिम्मेदारी संभालने के दौरान भी नेहा मारव्या सिंह को अधिकारियों और कर्मचारियों की नाराजगी का सामना करना पड़ा। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, उनके काम करने के तरीके को लेकर कर्मचारियों और अधिकारियों में असंतोष था।अधिकारियों की ओर से यह भी आरोप लगाए गए कि एक बैठक के दौरान अपर संचालक स्तर की महिला अधिकारियों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें बैठक से बाहर जाने के लिए कहा गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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चाय बंद करने से लेकर पांच कारों के इस्तेमाल तक के आरोप
विभाग के कुछ कर्मचारियों ने उनके कामकाज को लेकर कई तरह की शिकायतें और आरोप लगाए। कर्मचारियों का कहना था कि जहां आईएएस अधिकारी खुद दिनभर नारियल पानी का सेवन करती थीं, वहीं कार्यालय में कर्मचारियों को मिलने वाली चाय तक बंद कर दी गई थी। इसके अलावा उन पर विभागीय बजट से पांच वाहनों के इस्तेमाल और खर्च का भी आरोप लगाया गया। कर्मचारियों के मुताबिक, बड़ी संख्या में अधिकारियों के इंक्रीमेंट को लेकर भी असंतोष था। बताया गया कि सौ से अधिक अधिकारियों के इंक्रीमेंट नहीं लगाए गए, जिससे विभाग में नाराजगी बढ़ी।

कर्मचारियों की नाराजगी के बाद बदली जिम्मेदारी
लगातार बढ़ते असंतोष के बीच विभाग के अधिकारी और कर्मचारी नेहा मारव्या सिंह के खिलाफ लामबंद हुए। इसके बाद सरकार ने उन्हें तीनों महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटा दिया। अब उन्हें अजजा वित्त एवं विकास निगम की जिम्मेदारी दी गई है। नेहा मारव्या सिंह के लगातार तबादलों ने एक बार फिर उन्हें चर्चा में ला दिया है। एक साल के भीतर तीसरी बार हुए इस प्रशासनिक बदलाव में डिंडौरी कलेक्टर के पद से हटाया जाना भी शामिल है।

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