भोपाल/सुनील बंशीवाल/खबर डिजिटल/ विपक्ष ने पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े करते हुए डीजीपी से जवाब मांगा है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या शराब माफिया और प्रशासन के बीच किसी तरह की मिलीभगत है। हालांकि, ऐसे आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
गंभीर आरोप
विपक्ष का आरोप है कि हर ऐसी घटना के बाद सरकार जांच और कार्रवाई का भरोसा देती है, लेकिन इसके बावजूद अवैध शराब का कारोबार पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रहा है। जहरीली शराब से प्रभावित परिवारों के बीच मातम का माहौल है, ऐसे में केवल जांच के आश्वासन से काम नहीं चलेगा।
गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
विपक्ष ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना गृह विभाग की जिम्मेदारी है, जबकि अवैध शराब की बिक्री और तस्करी पर रोक लगाना आबकारी विभाग का दायित्व है। ऐसे में दोनों विभागों के मंत्रियों को जनता के सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
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विपक्ष ने सरकार से मांग की है कि जहरीली शराब के नेटवर्क की तह तक जाकर दोषियों और संरक्षण देने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही जिम्मेदारी तय करते हुए जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
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प्रभावी शासन की आस
विपक्ष ने तीखे अंदाज में कहा कि यदि सरकार अपने दायित्वों का निर्वहन करने में असमर्थ है तो जिम्मेदार मंत्रियों को पद पर बने रहने के बजाय इस्तीफा देना चाहिए। मध्यप्रदेश की जनता को शराब माफिया का प्रभाव नहीं, बल्कि जवाबदेह और प्रभावी शासन चाहिए।
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