सागर में कथित नकली शराब पीने से हुई मौतों के मामले को लेकर मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि किसी क्षेत्र में अवैध शराब का कारोबार चल रहा है तो केवल पुलिस और प्रशासन को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखें और लोगों के हित में आवाज उठाएं.
उमा भारती सोमवार को उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर पहुंची थीं. दर्शन और पूजा के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में सागर की घटना पर अपनी प्रतिक्रिया दी.
पंच से सांसद तक सभी की जिम्मेदारी
उमा भारती ने कहा कि अवैध शराब की बिक्री किसी भी स्थिति में नहीं होनी चाहिए. अगर किसी इलाके में ऐसा कारोबार चल रहा है तो समाज और जनप्रतिनिधियों को भी इसके खिलाफ सख्त रुख अपनाना चाहिए.
उन्होंने सवाल किया कि पंच, सरपंच, पार्षद, विधायक और सांसद आखिर क्या कर रहे थे. क्या उन्हें अपने क्षेत्र में चल रही ऐसी गतिविधियों की जानकारी नहीं थी. उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी अपनी जगह है, लेकिन जनप्रतिनिधियों को भी अपने कर्तव्य और धर्म का पालन करना चाहिए.
पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की शराबबंदी की दिशा में उठाए जा रहे कदमों की सराहना भी की.
दिल्ली प्रदर्शन पर भी बोलीं उमा
दिल्ली में हुए जेन-जी प्रदर्शन को लेकर उमा भारती ने इसे युवाओं के भीतर उठे आक्रोश और ऊर्जा का परिणाम बताया. हालांकि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई असंवैधानिक भाषा को गलत बताया.
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद प्रधानमंत्री ने लोकतांत्रिक भावना का सम्मान करते हुए युवाओं की भावनाओं को समझने की कोशिश की.
एक बयान का जिक्र करते हुए उमा भारती ने कहा कि सिस्टम की गंदगी खत्म किए बिना समस्या का समाधान संभव नहीं है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कॉकरोच गंदगी में पनपते हैं, इसलिए केवल उन्हें मारने से समस्या खत्म नहीं होगी. व्यवस्था में मौजूद गंदगी को दूर करना जरूरी है.
नागपंचमी हादसे से लेना होगा सबक
महाकाल मंदिर की व्यवस्थाओं पर उन्होंने कहा कि उन्हें हर बार पहले से बेहतर व्यवस्था दिखाई देती है. नागपंचमी पर हुए हादसे को उन्होंने दुखद बताया और श्रद्धालुओं से भी संयम बरतने की अपील की.
उनका कहना था कि पुलिस और प्रशासन की भी एक सीमा होती है. श्रद्धालुओं को भी भीड़ और परिस्थितियों को देखकर आगे बढ़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि उस दिन कुछ अनुमान गलत साबित हुए और भविष्य के लिए इससे सबक लेना जरूरी है.
सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण पर सुझाव
सिंहस्थ क्षेत्र में अतिक्रमण के मुद्दे पर उमा भारती ने कहा कि हरिद्वार और प्रयागराज की तरह यहां भी धार्मिक आयोजन के क्षेत्र को सुरक्षित रखा जाना चाहिए. उन्होंने सुझाव दिया कि सिंहस्थ क्षेत्र में जिन लोगों की जमीन आती है, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए.
उनके मुताबिक, पर्याप्त मुआवजा मिलने पर लोग स्वेच्छा से जमीन छोड़ सकते हैं और इस तरह क्षेत्र में अवैध निर्माण की समस्या को भी रोका जा सकता है.
