वित्त मंत्रालय ने सोमवार को डिजिटल पेमेंट को लेकर स्थिति साफ करते हुए कहा कि 2,000 रुपये तक के UPI ट्रांजैक्शन और RuPay डेबिट कार्ड से किए जाने वाले पेमेंट पर ग्राहकों से किसी तरह का अतिरिक्त चार्ज नहीं लिया जा सकता. मंत्रालय के मुताबिक बैंक या पेमेंट सिस्टम से जुड़े प्रोवाइडर इस तरह के ट्रांजैक्शन के लिए सीधे या किसी दूसरे तरीके से शुल्क नहीं वसूल सकते.
सरकार ने यह फैसला पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट, 2007 की धारा 10A के तहत लागू किया है. इसके तहत बैंकों और सिस्टम प्रोवाइडर्स को 2,000 रुपये तक के UPI पेमेंट और RuPay आधारित डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन पर किसी भी तरह की फीस लगाने से रोक दिया गया है. यानी इस सीमा तक पेमेंट करने या पैसा हासिल करने वाले व्यक्ति पर चार्ज डालना नियमों के खिलाफ होगा.
बड़े UPI मर्चेंट पेमेंट पर बदल सकता है नियम
दरअसल, अगस्त में सरकार ने UPI के जरिए होने वाले कुछ बड़े मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मामूली Merchant Discount Rate यानी MDR लागू करने की संभावना को मंजूरी दी थी. यह व्यवस्था एक तय सीमा से अधिक के कुछ चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर लागू हो सकती है.
हालांकि, सरकार ने इस दौरान यह साफ रखा था कि आम ग्राहकों के UPI पेमेंट पर इसका असर नहीं पड़ेगा. खास तौर पर पर्सन-टू-पर्सन ट्रांजैक्शन और कंज्यूमर पेमेंट को फ्री रखने की बात कही गई थी. इसका मतलब है कि रोजमर्रा के छोटे UPI पेमेंट को लेकर आम यूजर को किसी नए चार्ज की चिंता करने की जरूरत नहीं है.
डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत करने की कोशिश
सरकार का कहना है कि MDR से जुड़े संभावित बदलाव का मकसद डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर किसी तरह का बोझ डालना नहीं, बल्कि इसे लंबे समय तक टिकाऊ बनाना है. सरकार भारत के डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को ज्यादा मजबूत और प्रतिस्पर्धी बनाने पर जोर दे रही है.
मंत्रालय के अनुसार, देश में डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में सिस्टम को इस तरह तैयार करना जरूरी है कि वह भारत की तेजी से बढ़ती डिजिटल इकॉनमी की जरूरतों को लंबे समय तक पूरा कर सके.
बाहरी दबाव की खबरों को सरकार ने बताया गलत
इस बीच कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि UPI से जुड़ी प्रस्तावित नीतियों में बदलाव के पीछे बाहरी दबाव या किसी तरह का विदेशी प्रभाव हो सकता है. वित्त मंत्रालय ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है.
मंत्रालय ने ऐसी खबरों को बेबुनियाद और भ्रामक बताया. सरकार का कहना है कि डिजिटल पेमेंट से जुड़े फैसले भारत की अपनी जरूरतों और देश के डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत करने के उद्देश्य से लिए जा रहे हैं.
