अगस्त 2026 में देश की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82 फीसदी हो गई, जो जुलाई के 4.45 फीसदी से ज्यादा है. महंगाई लगातार तीसरे महीने RBI के 4 फीसदी लक्ष्य से ऊपर रही.
खाने-पीने की चीजों की कीमतों का असर भी महंगाई के आंकड़ों पर साफ दिखाई दिया. खाद्य मुद्रास्फीति यानी CFPI अगस्त में बढ़कर 5.95 फीसदी हो गई, जबकि जुलाई में यह 5.52 फीसदी थी. इसका सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है. हालांकि कुछ सब्जियों के दाम सालाना आधार पर कम हुए हैं, लेकिन कुल मिलाकर महंगाई का दबाव बना हुआ है.
लगातार तीसरे महीने RBI के लक्ष्य से ऊपर
अगस्त में खुदरा महंगाई लगातार तीसरे महीने भारतीय रिजर्व बैंक के 4 फीसदी लक्ष्य से ऊपर रही. मई में CPI महंगाई 3.93 फीसदी थी. इसके बाद जून में यह बढ़कर 4.38 फीसदी और जुलाई में 4.45 फीसदी हो गई. अगस्त में इसमें और तेजी आई और दर 4.82 फीसदी तक पहुंच गई.
नई CPI सीरीज में अब तक उपलब्ध आठ महीनों के आंकड़ों में अगस्त की खुदरा महंगाई सबसे ज्यादा रही है.
प्याज, लहसुन और अदरक ने बढ़ाई रसोई की चिंता
अगस्त में सब्जियों की कीमतों ने भी महंगाई का दबाव बढ़ाया. प्याज की महंगाई जुलाई के 22.54 फीसदी से बढ़कर अगस्त में 48.27 फीसदी हो गई. इसी तरह लहसुन की महंगाई 35.36 फीसदी से बढ़कर 43.60 फीसदी पहुंच गई.
अदरक के दाम भी काफी ज्यादा रहे और इसकी महंगाई दर 73.82 फीसदी दर्ज की गई. प्याज, लहसुन और अदरक अगस्त में देश की सबसे ज्यादा महंगाई वाली पांच चीजों में शामिल रहे.
टमाटर और आलू ने दी थोड़ी राहत
जहां कुछ सब्जियों ने घरेलू बजट बिगाड़ा, वहीं टमाटर और आलू की कीमतों में सालाना आधार पर गिरावट देखने को मिली. अगस्त में टमाटर के दाम 31.09 फीसदी कम रहे. आलू की कीमत में भी 13.14 फीसदी की कमी दर्ज की गई.
गांवों में महंगाई का दबाव ज्यादा
अगस्त में ग्रामीण इलाकों में खुदरा महंगाई 5.23 फीसदी रही, जो जुलाई के 4.84 फीसदी से अधिक है. शहरों में भी महंगाई बढ़ी और यह 3.96 फीसदी से बढ़कर 4.31 फीसदी हो गई.
महंगाई का असर सिर्फ खाने की चीजों तक सीमित नहीं रहा. रेस्तरां और होटल सेवाओं की महंगाई 8.38 फीसदी रही, जबकि व्यक्तिगत देखभाल और अन्य सेवाओं से जुड़ी महंगाई 15.17 फीसदी दर्ज की गई. इसके अलावा सोने, हीरे और प्लेटिनम के आभूषणों की कीमतों में सालाना आधार पर 35.53 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि चांदी के आभूषणों की महंगाई 107.11 फीसदी रही.
