डिंडोरी /खबर डिजिटल /शैलेश नामदेव/ डिंडोरी जिले की जनपद पंचायत करंजिया के तहत आने वाली ग्राम पंचायत मोहतरा में लगातार कर्मचारियों की अनुपस्थिति से परेशान होकर महिला सरपंच ने पंचायत भवन पर ताला जड़ दिया। मोहतरा पंचायत की आबादी 5 हजार से अधिक है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले एक महीने से न तो कोई पंचायत सचिव दफ्तर आ रहा और न ही रोजगार सहायक का कोई अता-पता। जब गाँव के चक्कर काट-काटकर ग्रामीण परेशान हो गए और सरपंच साहिबा की गुहार भी बेअसर साबित हुई, तो सचिव-रोजगार सहायक की गैरहाजिरी पर कार्यालय में ताला लगा दिया।
सरपंच लक्ष्मी टेकाम ने ग्रामीणों को साथ लेकर पंचायत भवन के मुख्य दरवाजे पर ताला जड़ दिया और सीधे जनपद पंचायत करंजिया पहुँच गईं। वहाँ उन्होंने ताले की चाबी सीधे जिम्मेदार अधिकारियों के हाथ में थमा दी और दोटूक कह दिया “जब दफ्तर में काम करने वाला कोई बंदा ही नहीं है, तो इस इमारत को खुला रखकर हम किसे बेवकूफ बना रहे हैं?”

कर्मचारियों के न होने से पंचायत में पिछले एक महीने से सरकारी योजनाओं का बंटाधार हो चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि संबल योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन और ई-केवाईसी के जरूरी काम ठप पड़े हैं। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जैसे बुनियादी कागजात भी नहीं बन पा रहे हैं। मनरेगा के तहत काम करने वाले मजदूरों का भुगतान फंसा हुआ है।
हर छोटे-बड़े काम के लिए ग्रामीणों को अन्य दफ्तरों के धक्के खाने पड़ रहे थे।
पूरे मामले पर जब प्रशासनिक हलकों में बवाल बढ़ा, तो जनपद पंचायत करंजिया के सीईओ राजीव तिवारी का बयान सामने आया। सीईओ साहब का तर्क है कि 11 सितंबर को ही चंद्रना पंचायत के सचिव को मोहतरा का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया था। उन्होंने सरपंच द्वारा पंचायत भवन पर ताला जड़े जाने को अनुचित बताया है, साथ ही आश्वासन दिया है कि वे मामले में बातचीत कर ताला खुलवाएंगे और कामकाज सुचारू करवाएंगे। अब देखना यह होगा कि सरपंच के इस ‘धांसू स्टाइल’ के प्रदर्शन के बाद मोहतरा पंचायत को स्थायी सचिव मिलता है या कागजों पर ही अतिरिक्त प्रभार का खेल चलता रहता है!

