जबलपुर/भोपाल: मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय Makhanlal Chaturvedi Journalism University में प्रोफेसरों की नियुक्तियों को लेकर विवाद एक बार फिर गहरा गया है। जबलपुर उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने इस मामले में एक रिट अपील (1269/2026) स्वीकार करते हुए पूर्व कुलपति बी.के. कुठियाला और डॉ. पी. शशिकला सहित सात प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। यह पूरा मामला विश्वविद्यालय में नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं से है।
क्या है पूरा मामला?
डॉ. आशुतोष मिश्रा ने अपने वकील केसी घिडियाल, सीनियर एडवोकेट और संपत कुमार कुशवाहा के ज़रिए उनके अपॉइंटमेंट को चुनौती दी है। उन्होंने उच्च न्यायालय से कहा कि पी शशिकला यूनिवर्सिटी के न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर अपॉइंट होने की निर्धारित शर्तों को पूरा नहीं करती थीं, क्योंकि उनके पास प्रकाशित विज्ञापन और नियम के हिसाब से ज़रूरी डिग्री और अनुभव नहीं था।
हाई कोर्ट के सामने दलीलें दी गई कि इस पद का एडवर्टाइजमेंट मार्च 2012 में हुआ था, जिसमें पीएचडी और 8 साल के टीचिंग एक्सपीरियंस और मिनिमम ए पी आई स्कोर के अलावा कंप्यूटर एप्लीकेशन/मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री ज़रूरी थी। इंटरव्यू सितंबर 2013 में हुआ और नियुक्ति जुलाई 2014 में दी गई जबकि पी शशिकला के पास ज़रूरी पात्रता नहीं थी।
याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदु
कोर्ट के ध्यान में लाया गया है कि उनके पास 1996 में कंप्यूटर साइंस में एम एस सी और 2010 में बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी भोपाल से इसी सब्जेक्ट में डॉक्टरेट है, जबकि उनके पास मास्टर ऑफ़ कंप्यूटर एप्लीकेशन की डिग्री नहीं थी, जो एक प्रोफेशनल डिग्री है और विज्ञापन के आधार से ज़रूरी थी। पी शशिकला ने 2005 से 2010 के बीच माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय में नियमित कर्मचारी रहते हुए पी एच डी की तथा रिसर्च डिग्री लेने के लिए छुट्टी लेना अनिवार्य था।
योग्यता और डिग्री का मुद्दा
दलीलों में यह भी कहा गया है कि उन्हें नवंबर 2016 में प्रोफेसर के तौर पर प्रोन्नति दी गई जबकि उन्हें जुलाई 2014 में ही एसोसिएट प्रोफेसर का पद मिला था और कैस (करियर एडवांसमेंट स्कीम) में प्रोफेसर बनने के लिए इस पद पर कम से कम तीन साल का अनुभव ज़रूरी है और उन्हें एसोसिएट प्रोफेसर के तौर पर ढाई साल से भी कम अनुभव के साथ प्रमोट किया गया।
पदोन्नति (Promotion) पर सवाल
इस मामले में अन्य प्रतिवादी मध्य प्रदेश सरकार, हायर एजुकेशन और जनसंपर्क विभाग और यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति बी के कुठियाला हैं, जिनके कार्यकाल में पी शशिकला को एसोसिएट प्रोफेसर नियुक्त किया गया था और प्रोफेसर के तौर पर प्रमोट भी किया गया था। डॉ. सीपी अग्रवाल को भी प्रतिभागी बनाया गया है जो पी शशिकला की नियुक्ति के समय यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर डिपार्टमेंट के अध्यक्ष थे।
इस रिट अपील में मध्य प्रदेश शासन, उच्च शिक्षा विभाग, जनसंपर्क विभाग, पूर्व कुलपति बी.के. कुठियाला, डॉ. पी. शशिकला और नियुक्ति के समय कंप्यूटर विभाग के अध्यक्ष रहे डॉ. सी.पी. अग्रवाल सहित कुल सात लोगों को प्रतिवादी बनाया गया है। विश्वविद्यालय में नियुक्तियों को लेकर पूर्व में भी कई मामले हाईकोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं। इस कानूनी प्रक्रिया और प्रशासनिक घटनाक्रम पर न्यायपालिका के अंतिम निर्णय के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
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