Kuno National Park Welcomes 4 New Cubs: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू हुए ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान से एक बेहद उत्साहजनक और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने चार नए शावकों को जन्म दिया है। इस नई किलकारी के गूंजने के साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या 52 से बढ़कर 56 हो गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में चीता संरक्षण, सुरक्षा और संवर्धन का कार्य निरंतर और सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है।
कूनो में जन्मी मादा KGP12 बनी मां, चार शावकों का स्वागत
कूनो राष्ट्रीय उद्यान के लिए यह पल ऐतिहासिक और बेहद हर्ष का है। भारत में जन्मी मादा चीता KGP12 ने 18 सितंबर को चार नन्हे शावकों को जन्म दिया। इन चार नई जिंदगियों के आने से देश में चीतों का परिवार अब और मजबूत हो गया है। इस उपलब्धि के साथ ही भारत में कुल जीवित चीतों की संख्या 56 और भारत में जन्मी चीतों की संख्या 36 हो गई है। यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि भारत में चीता संरक्षण अब केवल पुनर्स्थापना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्राकृतिक प्रजनन के नए और सफल चरण में प्रवेश कर चुका है।
2022 से 2026 तक ऐसा रहा चीता पुनर्स्थापना का सफर
भारत में चीता पुनर्स्थापना की यह ऐतिहासिक यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 17 सितंबर 2022 को शुरू हुई थी। इन चार वर्षों में इस अभियान ने कई महत्वपूर्ण मील के पत्थर पार किए हैं:
सितंबर 2022: नामीबिया से 8 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान लाए गए।
फरवरी 2023: दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते भारत पहुंचे।
फरवरी 2026: बोत्सवाना से 9 चीते भारत लाए गए।
इन सभी पुनर्स्थापना प्रयासों और देश में हुए प्राकृतिक प्रजनन के परिणामस्वरूप आज भारत में 56 जीवित चीतों की एक स्वस्थ और मजबूत आबादी मौजूद है।
मध्य प्रदेश बना चीता संरक्षण का प्रमुख केंद्र
वर्तमान में मध्य प्रदेश देश में चीता संरक्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है। नए शावकों के जन्म से पहले कूनो राष्ट्रीय उद्यान में 49 और गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में 3 चीते मौजूद थे। KGP12 द्वारा चार नए शावकों को जन्म दिए जाने के बाद अब अकेले कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीतों की संख्या बढ़कर 53 हो गई है, जबकि मध्य प्रदेश में कुल चीता संख्या 56 हो गई है। कूनो के साथ-साथ गांधी सागर में भी चीता संरक्षण का यह विस्तार बेहद सफल साबित हो रहा है।
शासन और मैदानी अमले की सक्रिय भूमिका
प्रधानमंत्री की इस महत्वाकांक्षी पहल को मध्य प्रदेश शासन द्वारा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। वन विभाग, वन्यजीव विशेषज्ञों, पशु चिकित्सकों और मैदानी अमले की टीम चीतों की सुरक्षा, स्वास्थ्य निगरानी, खान-पान और आवास प्रबंधन की जिम्मेदारी बखूबी संभाल रही है, जिससे देश में वन्यजीव संरक्षण का यह अध्याय लगातार नई ऊंचाइयां छू रहा है।
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