भोपाल/जबलपुर। ‘बड़े दुर्भाग्य की बात है हमारे विरोधी सदैव समाज के वोट तो पाते रहे, लेकिन लगातार झूठ बोलते रहे। उन्हें आदिवासी जननायकों को पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं बनने दिया। कांग्रेस और उनकी सरकार लंबे समय तक रही, लेकिन इस समाज से कोई राष्ट्रपति नहीं बनाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आदिवासी बहन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को देश का प्रेसिडेंट बनाया। यह हमारी सरकार के काम करने का तरीका है।
छत्तीसगढ़ में जनजातीय नेता विष्णुदेव साय मुख्यमंत्री हैं। हमारी सरकार रानी दुर्गावती लोक का निर्माण करेगी। निमाड़ के जनजातीय नायक क्रांतिसूर्य टंट्या मामा के नाम पर खरगोन में विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है। बुंदेलखंड के सागर में भी रानी अवंती बाई लोधी के नाम पर विश्वविद्यालय की शुरुआत की गई है। प्रदेश के गौरवशाली अतीत को सबके सामने लाना राज्य सरकार का दायित्व है।
सरकार जनजातीय महापुरुषों और बलिदानियों के जीवन पर फिल्म तैयार करने सहित सभी योजना में पूरा सहयोग करेगी।’ यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 18 सितंबर को जबलपुर में कही। सीएम डॉ. यादव जबलपुर में आयोजित जनजातीय महानायक अमर शहीद राजा शंकर शाह एवं कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और जनजातीय महानायक राजा शंकर शाह और रघुनाथ शाह की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि हमारे लिए आज का दिन बेहद पवित्र है। यह दिन उस दौर से संबंधित है, जब अंग्रेजों का शासनकाल था। उस समय कहा जाता था कि अंग्रेजों के राज्य में सूर्यास्त नहीं होता।
अंग्रेज इतने बड़े भूभाग में सरकार चलाते थे। हमें गर्व है आदिवासी नायक राजा शंकर शाह-कुंवर रघुनाथ शाह ने उन्हें देश की शक्ति से परिचित कराया। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि 1857 के पहले समर में बलिदान से पहले आदिवासी नायक राजा शंकर शाह ने गीतों-कविताओं के माध्यम से आजादी की अलख जगाई। वे देश और धर्म को साथ लेकर चले। उन्होंने तलवार का काम कलम से करके दिखाया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सिकल सेल में अभूतपूर्व काम किया गया। मध्यप्रदेश के साथ-साथ गुजरात और राजस्थान में बड़ी संख्या में आदिवासी समाज रहता है। उन्हें सिकल सेल से बचाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने अभियान चलाया। उनके साथ-साथ राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने भी इस दिशा में पूरा ध्यान दिया। सरकार के स्तर पर भी हमने राजा भभूत सिंह, राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह, रानी दुर्गावती जैसे महापुरुषों को पाठ्यक्रम में शामिल किया, ताकि भविष्य में पीढ़ियां इनके बारे में जानें, इनको समझें।
