इंदौर/खबर डिजिटल/ इंदौर हमेशा से मेहमानों का स्वागत करने वाला शहर रहा है। इतने वक्त से देख रहे हैं कि शहर में कई दलों के नेता आए, और चले गए। अपनी बात को उन्होंने गंभीरता से रखा। देश के सभी आंदोलनों में भी शहर के बाशिंदे कदम ताल करते नजर आए। फिर एक दम से ऐसा क्या हुआ कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ से पहले शहर को ‘झूठ की गूंज’ नाम के स्लोगन से पाट दिया गया। इससे पहले आम जनता से खबर डिजिटल ने बातचीत की, तो उन्होंने कहा कि नगर में हर बड़े व्यक्ति का शालीनता से स्वागत करना चाहिए, ताकि स्वस्थ राजनीति की परंपरा बंधी रहे।
कोचिंग सेंटर संचालक को दिए पत्र
कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इंदौर दौरे और ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले शहर के कोचिंग सेंटरों को एक पत्र दिए जाने का मामला सामने आया है। इंदौर के एक कोचिंग सेंटर संचालक ने यह पत्र साझा करते हुए दावा किया है कि कार्यक्रम में शामिल होने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर कोचिंग संस्थानों पर जिम्मेदारी तय की जा रही है। कोचिंग सेंटर संचालक के मुताबिक, पुलिस प्रशासन की ओर से कोचिंग संस्थानों को पत्र देकर कार्यक्रम में जाने वाले छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने के लिए कहा जा रहा है। संचालक का कहना है कि संस्थान अपने यहां पढ़ने वाले प्रत्येक छात्र की व्यक्तिगत गतिविधि पर नजर नहीं रख सकता और न ही यह सुनिश्चित कर सकता है कि कार्यक्रम में जाने के बाद प्रत्येक छात्र कहां और किस स्थिति में है।
कोचिंग संचालकों ने उठाए सवाल
कोचिंग सेंटर संचालक का कहना है कि इस तरह के पत्रों के जरिए संस्थानों पर दबाव बनाया जा रहा है। उनका तर्क है कि यदि कोई छात्र किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जाता है, तो उसकी सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी होनी चाहिए। संचालक ने सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी सार्वजनिक आयोजन में शामिल होने वाले हर व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन का दायित्व है। इसमें कार्यक्रम में आने वाला कोई विशिष्ट अतिथि हो या आम नागरिक, सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी प्रशासन की ही होती है।
बीजेपी के नेताओं का भव्य स्वागत
कुछ दिन पहले ही बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन इंदौर आए थे, उनका शहरवासियों ने जोरदार स्वागत किया। उनकी बात को सुनने के लिए लाखों लोगों को जमावड़ा लगा। दूसरी तरफ राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले ‘झूठ की गूंज’ के पोस्टर लगाकर शहर में क्या संदेश दिया गया। आम नागरिकों का कहना है कि वो सभी दलों के समान दृष्टि से देखते है, जिन्होंने काम किया है, जनता उनकी तरफ जाने में कोई गुरैज नहीं करेगी, ऐसे में देश के किसी भी बड़े नेता के कार्यक्रम का विरोध करना, स्वागत की मालवी परंपरा का हनन है।
