ग्वालियर/खबर डिजिटल/ मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को लेकर मामला अब हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ पहुंच गया है। योजना को बंद करने और इसके तहत महिलाओं को दी जा रही ₹1,500 की मासिक आर्थिक सहायता पर रोक लगाने की मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण पर सवाल
यह जनहित याचिका ग्वालियर की पूर्व पार्षद सुधा दुबे की ओर से अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा के माध्यम से दायर की गई है। याचिका में योजना की उपयोगिता, सरकार पर पड़ने वाले लगातार वित्तीय भार और महिलाओं के दीर्घकालिक आर्थिक सशक्तीकरण को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को मिल रही राशि
याचिका में बताया गया है कि लाड़ली बहना योजना के तहत प्रदेश में 1.25 करोड़ से अधिक महिलाएं लाभ प्राप्त कर रही हैं, और प्रत्येक पात्र महिला को वर्तमान में ₹1,500 प्रतिमाह दिए जा रहे हैं। याचिका में इस नियमित खर्च के चलते राज्य के वित्तीय संसाधनों पर पड़ने वाले प्रभाव का मुद्दा उठाया गया है।
रोजगार को बढ़ावा देने की बात
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई है कि महिलाओं को सीधे नकद राशि देने के बजाय सरकार को रोजगार, कौशल विकास और स्वरोजगार जैसे स्थायी आर्थिक अवसरों पर अधिक जोर देना चाहिए। याचिका में योजना के दीर्घकालिक प्रभाव और इसके उद्देश्यों की समीक्षा की मांग भी की गई है।
हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा पूरा रिकॉर्ड
मामले की सुनवाई के दौरान ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य के मुख्य सचिव के साथ महिला एवं बाल विकास और वित्त विभाग के प्रमुख सचिवों को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने योजना के लाभार्थियों की संख्या, भुगतान की जा रही राशि और संबंधित रिकॉर्ड उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।
अभी किस्त बंद करने का कोई आदेश नहीं
लाड़ली बहना योजना को लेकर दायर याचिका के बाद महिलाओं को मिलने वाली ₹1,500 की किस्त पर तत्काल रोक लगने की स्थिति नहीं है। हाईकोर्ट ने फिलहाल योजना के संचालन या मासिक भुगतान पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई है। अब सरकार को चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करना है, जिसके बाद मामले में आगे की सुनवाई होगी। सइस मामले में अदालत का अगला रुख सरकार के जवाब और याचिका में उठाए गए मुद्दों पर होने वाली आगे की सुनवाई के बाद स्पष्ट होगा।
