Tuesday, November 3, 2026
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​”चुनाव आते ही शुरू हो जाती है नौटंकी!” फर्जी जाति प्रमाण पत्र विवाद में सिंधिया पर सीधे वार से हड़कंप

पूर्व आईपीएस अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है. इस कार्रवाई के बाद से मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है. इस पूरे मामले पर उनकी पत्नी और पूर्व भाजपा नेता ममता मीणा ने सीधे तौर पर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर निशाना साधा है. उन्होंने तीखे तेवर दिखाते हुए साफ कहा कि झूठे केस दर्ज कराकर उनके परिवार को डराने की कोशिश न की जाए. ममता मीणा ने चुनौती देते हुए कहा कि उन पर भले ही दो-चार केस और दर्ज करवा दिए जाएं, वे किसी भी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं.

‘कितने भी केस करा लो, हम डरने वाले नहीं’ – ममता मीणा का हमला

एक वीडियो संदेश जारी करते हुए ममता मीणा ने कहा कि गुना की जनता अखबारों के जरिए इस पूरी कार्रवाई से वाकिफ हो चुकी है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पति के खिलाफ यह एफआईआर पूरी तरह सिंधिया के इशारे पर दर्ज कराई गई है. जब से उनके पति सरकारी सेवा में आए हैं, तभी से उनका परिवार बेवजह की परेशानियां झेल रहा है. उन्होंने ऐलान किया कि सिंधिया की इस साजिश के खिलाफ वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी. इसी दौरान उन्होंने सिंधिया द्वारा मतदाताओं को धमकाने के पुराने वाकये का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी इस तानाशाही को केवल गुना ही नहीं, बल्कि पूरा प्रदेश और देश देख चुका है.

‘चुनाव आते ही शुरू हो जाती है राजा-महाराजाओं की नौटंकी’

केंद्रीय मंत्री की कार्यशैली पर करारा प्रहार करते हुए ममता मीणा ने कहा कि सिंधिया प्रदेश में महज तीन दिनों के दौरे पर आते हैं और अधिकारियों पर अपना रौब गालते हैं. वे अधिकारियों को डरा सकते हैं, लेकिन ममता मीणा को बिल्कुल नहीं दबा सकते. उन्होंने चुनावी हथकंडों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव आते ही सिंधिया परिवार का असली नाटक शुरू हो जाता है. चुनाव के समय उनकी पत्नी गांव-गांव घूमकर हाथ जोड़कर वोट मांगती हैं. गरीबों के घरों में खाना खाने और पानी भरने का जो ढोंग रचा जाता है, वह सिर्फ जनता को गुमराह करने की नौटंकी है.

‘गरीबों के भगवान बनते हैं तो किसानों को खाद दिलवाएं’

ममता मीणा ने सिंधिया पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि खुद को गरीबों और किसानों का मसीहा बताने वाले नेता को धरातल पर आकर काम करना चाहिए. अगर वे वाकई किसानों के हमदर्द हैं, तो टोकन के लिए लंबी-लंबी लाइनों में धक्के खा रहे अन्नदाताओं को खाद उपलब्ध करवाएं. उन्होंने प्रशासनिक तंत्र पर निशाना साधते हुए कहा कि अधिकारी केवल डर के मारे सिंधिया के इशारों पर नाच रहे हैं, वरना इतनी जल्दबाजी में यह कार्रवाई कभी संभव ही नहीं होती.

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