Tuesday, November 3, 2026
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गोरा कला की भूमि प्रविष्टियों के बाद अब पूरी चंदेरी तहसील के राजस्व रिकॉर्ड की जांच की मांग

चंदेरी/ तहसील चंदेरी अंतर्गत ग्राम गोरा कला की भूमि के राजस्व अभिलेखों में बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के कथित रूप से की गई प्रविष्टियों को लेकर तहसीलदार चंदेरी द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस के बाद अब गोरा कला सहित संपूर्ण चंदेरी तहसील में ऐसी भूमि प्रविष्टियों की जांच की मांग उठने लगी है।

तहसीलदार चंदेरी द्वारा जारी नोटिस में ग्राम गोरा कला की भूमि के सर्वे क्रमांक 268/29, 268/30, 268/31, 268/32, 268/33, 268/35, 268/36 एवं 268/37 का उल्लेख किया गया है। नोटिस के अनुसार इन भूमियों में कथित रूप से बिना सक्षम अधिकारी के आदेश के प्रविष्टियां दर्ज की गईं। इस मामले में संबंधित पटवारी बाबूलाल कलावत से सात दिवस में स्पष्टीकरण मांगा गया है।

अन्य मामलों की भी हो जांच

खबर डिजिटल के संवाददात द्वारा मिली जानकारी के अनुसार इस कार्रवाई के बाद मांग की जा रही है कि जांच को केवल उक्त सर्वे क्रमांकों तक सीमित न रखा जाए। चंदेरी तहसील के सभी गांवों में उन भूमि अभिलेखों की जांच कराई जाए, जिनमें बिना सक्षम आदेश अथवा निर्धारित राजस्व प्रक्रिया के नाम या अधिकार संबंधी प्रविष्टियां किए जाने की शिकायतें हैं।

विशेष रूप से ऐसे मामलों की जांच जरूरी बताई जा रही है, जिनमें कथित रूप से पहले संदिग्ध प्रविष्टि की गई और बाद में उसी के आधार पर नामांतरण प्रकरण स्वीकृत कर दिए गए।

प्रविष्टि से नामांतरण तक हो रिकॉर्ड की जांच

नागरिकों की मांग है कि जांच के दौरान प्रत्येक मामले में मूल एवं पुराने खसरे, वर्तमान खसरा, नामांतरण प्रकरण की पूरी नस्ती, पटवारी की रिपोर्ट, राजस्व निरीक्षक की रिपोर्ट, सक्षम अधिकारी का आदेश तथा उसके आधार पर की गई अंतिम प्रविष्टि का मिलान कराया जाए।

यदि किसी भूमि की प्रारंभिक प्रविष्टि ही नियम विरुद्ध पाई जाती है और उसी के आधार पर बाद में नामांतरण स्वीकृत हुआ है, तो केवल पटवारी की भूमिका तक जांच सीमित न रखकर पूरी प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी रिकॉर्ड के आधार पर निर्धारित की जानी चाहिए।

प्रशासन से व्यापक जांच की मांग

स्थानीय स्तर पर मांग की जा रही है कि गोरा कला से शुरू हुई जांच को संपूर्ण चंदेरी तहसील तक विस्तारित किया जाए और एक निर्धारित अवधि के भूमि रिकॉर्ड तथा नामांतरण प्रकरणों का परीक्षण कराया जाए। इससे यह सामने आ सकेगा कि कितनी भूमि में संदिग्ध प्रविष्टियां हुईं और उनके आधार पर कितने नामांतरण स्वीकृत हुए।

हालांकि, किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को केवल आरोप के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। दस्तावेजों, राजस्व नस्तियों और संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण के आधार पर ही अंतिम जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।

गोरा कला के सर्वे क्रमांक 268/29 सहित अन्य संबंधित खसरों पर उठे सवाल अब इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि यदि ऐसी प्रविष्टियां अन्य स्थानों पर भी हुई हैं, तो उनकी निष्पक्ष और व्यापक जांच से ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

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