- राजस्थान के फील्ड्स में डिजिटल ट्विन्स, मशीन लर्निंग और एडवांस्ड प्रोसेस कंट्रोल का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे उत्पादन में 16 प्रतिशत की गिरावट के बावजूद प्रति बैरल लागत स्थिर बनी हुई है।
नई दिल्ली: अपस्ट्रीम ऑयल एंड गैस कंपनी, वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड (एनएसईः वीओजीएल, बीएसईः 544782) ने पिछले वित्तीय वर्ष में राजस्थान में अपनी ऑपरेटिंग लागत को काफी हद तक स्थिर रखा, जबकि इसके पुराने होते फील्ड्स से उत्पादन में गिरावट आई। संचालन में अनुशासन तथा डिजिटल एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वजह से ऐसा संभव हो पाया है।
31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष में राजस्थान में ऑपरेटिंग लागत 16.4 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि पिछले साल यह 16.6 डॉलर पर थी। पूरे ऑयल एंड गैस बिज़नेस में, ऑपरेटिंग लागत 15.5 डॉलर प्रति बैरल ऑयल इक्विवेलेंट रही जो पहले 15.6 डॉलर थी। इसी दौरान, ग्रॉस द्वारा संचालन उत्पादनर 103.2 हजार बैरल ऑयल इक्विवेलेंट प्रतिदिन से घटकर 87.2 हजार बैरल हो गया – यानी इसमें 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी के अनुसार फील्ड्स के पुराने हो जाने की वजह से ऐसा हुआ है। अकेले राजस्थान में इतनी ही गिरावट देखी गई है।
पुराने होते फील्ड में, आमतौर पर हर बैरल के उत्पादन की लागत बढ़ जाती है, क्योंकि संचालन की निर्धारित लागत कम बैरल पर पड़ती है। यहाँ प्रति बैरल लागत इसके उलट रही।
कंपनी के अनुसार लागत के इस परफॉर्मेंस के पीछे तीन कारण हैः ऑप्टिमाइज़्ड पॉलीमर इंजेक्शन, केमिकल खर्च के लिए ज़्यादा लागत प्रभावी तरीका, और रखरखाव की गतिविधियों में कुशलता। रखरखाव में इसके डिजिटल और एआई टूल्स काम आते हैं।
वेदांता ऑयल एंड गैस लिमिटेड के एक प्रवक्ता ने कहा, “एक रॉड पंप आमतौर पर खराब होने से पहले ही बता देता है कि वह खराब होने वाला है। सिग्नल हमेशा डेटा में होता था। बदलाव यह आया है कि यह जानकारी कितनी तेज़ी से उस इंजीनियर तक पहुँचती है जो इस पर कार्रवाई कर सकता है। राजस्थान के फील्ड्स में डिजिटल ट्विन्स, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स और एडवांस्ड प्रोसेस कंट्रोल का इस्तेमाल करना इस बात का प्रमाा है कि हमने फील्ड्स के स्वाभाविक रूप से पुराने होने के बावजूद लिफ्टिंग लागत को कैसे स्थिर बनाए रखा है।”
राजस्थान की युनिट्स में, वेदांता ऑयल एंड गैस अपने फिजिकल उपकरणों के साथ-साथ डिजिटल ट्विन्स का भी इस्तेमाल करती है। ये सॉफ़्टवेयर मॉडल दिखाते हैं कि हर पंप को कैसे काम करना चाहिए। जब ज़मीन के अंदर लगा इक्विपमेंट मॉडल के अनुसार काम नहीं करता, तो सिस्टम इसकी सूचना देता है। एक एडवांस्ड प्रोसेस कंट्रोल लेयर पंप को उसकी ऑपरेटिंग लिमिट में रखती है, जबकि प्रोडक्शन इंजीनियर तय करता है कि क्या करना है। इसी प्रोडक्शन डेटा पर मशीन लर्निंग टूल्स का एक सेट काम करता है। लाइव वेल फ़ीड पर प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स का इस्तेमाल होता है। कंपनी का डेटा-ड्रिवन रिज़रवॉयर मैनेजमेंट-सेंट्रलाइज़्ड सिस्टम प्रोडक्शन डेटा और अनुमानों को अपने रिज़रवॉयर मॉडल में शामिल करता है। साथ ही, कंपनी का अपना जेनरेटिव एआई प्लेटफ़ॉर्म सुरक्षा पर निगरानी रखते हुए इक्विपमेंट एनालिटिक्स और टेक्निकल रिकॉर्ड से ज़रूरी जानकारी हासिल करता है।
यह डिजिटल सिस्टम रोज़ाना के प्रोडक्शन से कहीं आगे तक फैला हुआ है। कोरम प्लेटफ़ॉर्म पर आधारित पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सिस्टम ने प्लानिंग और एनालिसिस में लगने वाले समय को लगभग 30 प्रतिशत कम कर दिया है। ऐश्वर्या और कृष्णा गोदावरी के गहरे पानी वाले इलाकों में जांचा गया क्लाउड-बेस्ड सिस्मिक इमेजिंग टूल, पुराने तरीके की तुलना में 20 से 30 गुना तेज़ी से प्रोसेसिंग करता है। इससे नए कुओं की योजना बनाते समय कंपनी को ज़मीन के नीचे की स्थिति की बेहतर समझ मिल पाती है।
कंपनी उत्पादन में कमी को रोकने के लिए दो तरह से काम कर रही है। साल के दौरान, उत्पादन में गिरावट को धीमा करने के लिए कंपनी ने राजस्थान में मौजूद अपने एसेट्स (मंगला, भाग्यम, ऐश्वर्या, टाइट ऑयल, रागेश्वरी डीप गैस और सरस्वती फ़ील्ड) में 21 इनफ़िल कुओं की ड्रिलिंग की। इसके अलावा, कंपनी ने नौ और एक्सप्लोरेशन कुओं की ड्रिलिंग की – जिसमें से छह ओएएलपी कैम्बे क्षेत्र में और तीन राजस्थान के बाड़मेर क्षेत्र में हैं।
