Wednesday, November 4, 2026
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दतिया में आशुतोष तिवारी को मिल सकती है विधायकी?… घनश्याम सिंह के निर्वाचन को चुनौती

आपराधिक प्रकरण का मामला

ग्वालियर/भोपाल/खबर डिजिटल/ दतिया विधानसभा उपचुनाव का परिणाम सामने आने के बाद अब कांग्रेस विधायक घनश्याम सिंह के निर्वाचन को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। भाजपा नेता और अधिवक्ता दीपक बेलपत्री ने 17 सितंबर 2026 को चुनाव याचिका दाखिल कर घनश्याम सिंह के चुनावी हलफनामे से जुड़ी जानकारी पर सवाल उठाए हैं।

1991 की FIR का उल्लेख नहीं करने का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि घनश्याम सिंह ने नामांकन के दौरान दाखिल चुनावी हलफनामे में दो आपराधिक मामलों की जानकारी दी थी, लेकिन वर्ष 1991 में दर्ज एक अन्य FIR का उल्लेख नहीं किया गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि यह जानकारी हलफनामे में दर्ज की जानी चाहिए थी। इस आधार पर भाजपा नेता ने घनश्याम सिंह के निर्वाचन की वैधता पर न्यायालय से विचार करने की मांग की है।

घनश्याम सिंह ने बताया साजिश
वहीं, घनश्याम सिंह की ओर से लगाए गए आरोपों को विरोधियों की साजिश बताया गया है। उनका कहना है कि जिस मामले का याचिका में उल्लेख किया गया है, उसकी जानकारी उन्हें नहीं थी। ऐसे में अब इस मामले में दोनों पक्षों के तर्क और उपलब्ध दस्तावेज अदालत के सामने रखे जाएंगे।

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45 दिन के भीतर दाखिल होती है चुनाव याचिका
चुनावी विवाद से जुड़े मामलों में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 81 के तहत चुनाव याचिका दाखिल करने की समयसीमा सामान्यतः परिणाम घोषित होने के 45 दिन के भीतर होती है। इस मामले में भी याचिका दाखिल किए जाने की तारीख और चुनाव परिणाम की तारीख के आधार पर समयसीमा के पहलू पर न्यायालय विचार करेगा।

क्या निर्वाचन रद्द हो सकता है?
याचिका दाखिल होने मात्र से घनश्याम सिंह का निर्वाचन रद्द नहीं होगा। अदालत पहले याचिका में लगाए गए आरोपों, हलफनामे में दी गई जानकारी, संबंधित रिकॉर्ड और दोनों पक्षों के तर्कों की जांच करेगी। इसके बाद ही यह तय होगा कि कथित रूप से आपराधिक मामले की जानकारी नहीं देने का निर्वाचन पर कोई कानूनी प्रभाव पड़ता है या नहीं। जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 101 के तहत कुछ परिस्थितियों में हाईकोर्ट किसी दूसरे उम्मीदवार को निर्वाचित घोषित कर सकता है, लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब सुनवाई के बाद अदालत उस संबंध में आवश्यक कानूनी निष्कर्ष पर पहुंचे।

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